महासमुंद :
जिले में खाद के नाम पर चल रहे गोरखधंधे पर 'तीखी नज़र' पड़ गई है! कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन अब फुल एक्शन मोड में है। सरायपाली और महासमुंद में की गई औचक छापेमारी ने उन दुकानदारों और गोदाम मालिकों के होश उड़ा दिए हैं जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे।
क्या मिला छापे में?
ओम फर्टिलाइज़र (सरायपाली): यहाँ की गई जांच में 298 बोरी यूरिया का स्टॉक कम मिला। प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से स्टॉक को जप्त कर लिया है और अब इस प्रतिष्ठान पर वैधानिक कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
महासमुंद (बग्गा कृषि सेवा केंद्र व मार्कफेड): यहाँ भी तहसीलदार जुगल किशोर पटेल की टीम ने खाद के भंडारण और अभिलेखों को खंगाला।
'तीखी नज़र' का सवाल:
प्रशासन की यह कार्रवाई तो सिर्फ एक शुरुआत है। सवाल यह है कि आखिर यूरिया की इतनी बड़ी खेप (298 बोरी) बिना रिकॉर्ड के कहाँ गायब हो गई? क्या इसके पीछे कोई बड़ा नेक्सस है? जो अधिकारी कागजों में हेरफेर होने के बावजूद 'सब चंगा है' की रिपोर्ट दे रहे थे, क्या उन पर भी कोई गाज गिरेगी?


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