बागबाहरा/कोमाखान (महासमुंद)
दो दिन पहले जब पूरा कोमाखान एक बेबस माँ के आंसुओं और सिस्टम की सुस्ती के खिलाफ 'अर्थी' लेकर खड़ा हुआ था, तब 'तीखी नज़र' ने साफ कहा था—न्याय मिलने तक यह लड़ाई जारी रहेगी। आज उस तीखी आवाज़ और ग्रामीणों के भारी आक्रोश का असर धरातल पर दिखने लगा है। पुलिस ने न सिर्फ अपनी सुस्ती छोड़ी, बल्कि हत्यारों की उस खौफनाक साजिश की धज्जियां उड़ा दीं, जिसे वे 'रोड एक्सीडेंट' का नाम देकर कानून की आँखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहे थे।
23 वर्षीय होनहार युवक चितरंजन पटेल की मौत के बाद जागे पुलिस प्रशासन ने मामले में हत्या की संगीन धाराएं जोड़ते हुए दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है।
15 अप्रैल की वो खौफनाक रात: रंजिश, साजिश और जानलेवा हमला
पुलिसिया तफ्तीश और आरोपियों के कबूलनामे से जो सच निकलकर सामने आया है, वो रूह कंपा देने वाला है। मामला पुरानी रंजिश और बदले की भावना का था। 15 अप्रैल 2026 की रात, जब चितरंजन अपनी मोटरसाइकिल से लौट रहा था, तभी लामीसरार मुर्गी फार्म मोड़ के पास घात लगाए बैठे टोंगोंपानी निवासी दीपेश साहू, कुंजन साहू और उनके एक अन्य साथी ने उसका रास्ता रोक लिया।
चितरंजन को घसीटते हुए कब्रिस्तान के पास ले जाया गया, जहाँ तीनों ने लाठी-डंडों से उस पर तब तक प्राणघातक वार किए, जब तक कि वह लहूलुहान होकर बेहोश नहीं हो गया।
साजिश ऐसी कि कानून भी चकमा खा जाए:
चितरंजन को अधमरा करने के बाद आरोपियों ने अपनी क्रूरता को छिपाने के लिए एक शातिर पटकथा रची। उन्होंने चितरंजन की मोटरसाइकिल को पत्थरों से कुचला और उसे एक बिजली के खंभे के पास फेंक दिया, ताकि दुनिया और पुलिस इसे एक साधारण 'रोड एक्सीडेंट' समझे।
मौत से 37 दिनों का संघर्ष और फिर सिस्टम के खिलाफ बगावत
हमले के बाद चितरंजन करीब एक महीने से ज्यादा समय तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। 22 मई को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। चितरंजन की मौत की खबर मिलते ही कोमाखान थाने के बाहर आक्रोश का जो सैलाब उमड़ा, उसने पुलिसिया तंत्र को हिलाकर रख दिया। माँ लीलाबाई पटेल की चित्कार और 'तीखी नज़र' की पैनी कवरेज ने प्रशासन को यह साफ संदेश दे दिया था कि अब कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एक्शन में पुलिस: बीएनएस (BNS) की धारा 103(1) के तहत बड़ी कार्रवाई
जनाक्रोश और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आगे आखिरकार कोमाखान और बागबाहरा पुलिस को त्वरित कदम उठाना पड़ा। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण में तुरंत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) जोड़ी गई।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दोनों मुख्य आरोपियों को धर दबोचा:
कुंजन साहू (पिता बालूराम साहू, उम्र 25 वर्ष, निवासी टोंगो पानी )
दीपेश साहू (पिता भुनेश्वर साहू, उम्र 24 वर्ष, निवासी टोंगोपानी )
दोनों आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। वैधानिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों को न्यायिक रिमांड पर न्यायालय में पेश कर दिया है। मामले का तीसरा आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
'तीखी नज़र' का नजरिया: उम्मीद की पहली किरण, पर लड़ाई अभी अधूरी है!
इस कार्रवाई के बाद आज बकमा गाँव और पीड़ित माँ की आँखों में इंसाफ की एक धुंधली सी उम्मीद जरूर जागी है। लेकिन सवाल अब भी खड़े हैं—शुरुआती जांच में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई? क्या पुलिस को जागने के लिए एक बेगुनाह की मौत का इंतजार था?
'तीखी नज़र'
इस मामले के तीसरे आरोपी की गिरफ्तारी होने तक और अदालत से इन दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा (उम्रकैद या फांसी) दिलाकर उनके अंजाम तक पहुँचाने तक चैन से नहीं बैठेगी।
न्याय की इस जंग में, हम पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं!

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