महामसुंद:
क्या हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए ज़मीन का टुकड़ा छोड़ रहे हैं या केवल पत्थर का ढेर? रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल से हमारी मिट्टी की सेहत खतरे में है। इसी गंभीर मुद्दे को लेकर कृषि विभाग ने 'खेत बचाओ अभियान' के तहत ज़िले की 22 पंचायतों में किसान चौपाल लगाई।
क्यों है यह चिंता का विषय?
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों और विभागीय अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि लगातार और असंतुलित तरीके से यूरिया व डीएपी के उपयोग से ज़मीन की प्राकृतिक उर्वरता खत्म हो रही है।
'तीखी नजर' का सीधा सवाल:
यदि हम अभी नहीं संभले, तो आने वाले समय में खेती की लागत दोगुनी हो जाएगी और उत्पादन आधा रह जाएगा। क्या आप इसके लिए तैयार हैं?
कृषि विभाग की सलाह - अब क्या करें किसान?
अधिकारी स्पष्ट कर रहे हैं कि सिर्फ यूरिया-डीएपी के भरोसे रहना अब नुकसानदेह है।
- बेहतर विकल्प अपनाएं: यूरिया-डीएपी की जगह एनपीके (NPK) और एसएसपी (SSP) का करें उपयोग।
- नैनो तकनीक: नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव को अपनाएं।
- मिट्टी की उम्र बढ़ाएं: हरी खाद, नील-हरित काई और जैव उर्वरकों का इस्तेमाल कर मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाएं।
कहां-कहां हुई चौपाल?
ज़िले के 4 विकासखंडों की 22 पंचायतों में ये चौपाल सजी:
- बसना: 08 पंचायतें
- सरायपाली: 07 पंचायतें
- महासमुंद: 05 पंचायतें
- पिथौरा: 02 पंचायतें
हमारा नज़रिया:
सरकार और कृषि विभाग जागरूकता फैला रहे हैं, लेकिन बदलाव की शुरुआत आपके खेत से होगी। 'तीखी नजर न्यूज़' सभी अन्नदाताओं से अपील करता है कि ज़मीन को ज़हर से बचाएं और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं।

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