बागबाहरा
छत्तीसगढ़ सरकार जहाँ एक ओर गरीब, आदिवासी और ग्रामीण परिवारों को निःशुल्क उपचार, दवाइयां और सुरक्षित मातृत्व सेवाएं देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं महासमुंद जिले के बागबाहरा ब्लॉक स्थित बोडराबांधा उप स्वास्थ्य केंद्र से आई शिकायतों ने इन दावों की पोल खोल दी है।
क्या है पूरा मामला?
वनांचल क्षेत्र में स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र पर पदस्थ रूरल हेल्थ ऑफिसर (RHO) अनीता वर्मा पर ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि:
प्रसव के दौरान महिलाओं से अवैध रूप से पैसे की मांग की जाती है।
मुफ्त मिलने वाली दवाइयों के नाम पर भी मरीजों से राशि वसूली जा रही है।
सामान्य प्रसव की स्थिति होने के बावजूद, मरीजों को डरा-धमकाकर निजी अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी के लिए भेजा जाता है।
इतिहास रहा है विवादित
ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित RHO अनीता वर्मा को वर्ष 2014-15 में एक 'मातृ मृत्यु' के मामले में निलंबित भी किया गया था। हालाँकि, मात्र तीन महीने बाद ही उनकी पुनः उसी उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थापना कर दी गई, जो अब विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
हजारों ग्रामीणों की स्वास्थ्य व्यवस्था खतरे में
बोडराबांधा उप स्वास्थ्य केंद्र पर लगभग 15 गांवों के लोग आश्रित हैं। यहाँ प्रतिदिन 15 से 20 मरीज इलाज के लिए आते हैं और हर माह 4 से 5 प्रसव कराए जाते हैं। ऐसे में यदि स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही और वसूली की खबरें सही हैं, तो यह सीधे तौर पर हजारों आदिवासियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
'मानक सूचकांक' प्रमाण-पत्र पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि जिस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (बागबाहरा) के अंतर्गत यह उप केंद्र आता है, उसे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वच्छता के लिए शासन द्वारा 'मानक सूचकांक प्रमाण-पत्र' से सम्मानित किया गया है। अब सवाल यह उठता है कि सम्मानित केंद्र के अंतर्गत आने वाले केंद्रों में ऐसी धांधली कैसे चल रही है?
ग्रामीणों ने विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषी स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी स्वास्थ्य तंत्र से गरीब जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।


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