Chhttisgarh:
महासमुंद से लेकर रायपुर तक सूरज देवता ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि आम जनता की खोपड़ी का 'फ्यूज' उड़ने की नौबत आ गई है! लोग घरों में वाटर कूलर और डक्टिंग सिस्टम के जुगाड़ में लगे हैं ताकि इस झुलसाने वाली गर्मी से किसी तरह जान बचाई जा सके।
लेकिन असली मज़ा और सस्पेंस तो हमारी सियासत में चल रहा है साहब...
ज़रा गौर से देखिए, इस भीषण गर्मी में भी हमारे नेताओं की 'जनसेवा' का जज़्बा रत्ती भर कम नहीं हुआ है! वो बात अलग है कि यह पूरी सेवा 16 डिग्री तापमान वाले चमचमाते 'सेंट्रलाइज्ड एसी' दफ्तरों और लग्जरी गाड़ियों के भीतर से हो रही है। साहब लोग बंद कमरों में ठंडे पानी की चुस्की लेते हुए फाइल पर दस्तखत करते हैं और बाहर आकर पसीने से लथपथ जनता को भाषण देते हैं— "भैया, हम चौबीसों घंटे आपकी सेवा में तप रहे हैं!" 'तीखी नज़र का चश्मा' पूछता है बदलाव और विकास के बड़े-बड़े दावे तो हर रोज़ अखबारों में छपते हैं, लेकिन जनता हैरान है कि ये 'सुशासन की ठंडी हवा' सिर्फ बड़े साहबों के केबिन तक ही क्यों सीमित रहती है? जब गरीब के घर का पंखा बिजली गुल होने की वजह से दोपहर में 'आईसीयू' में चला जाता है, तब सरकारी फाइलों में दर्ज 'बिजली सरप्लस' का दावा किस कोने में बैठकर आराम कर रहा होता है?
👁️ सच की खोज, तीखी सोच।
जनता की अदालत में आज का 'तीखा' सवाल: 👇
आपके इलाके में गर्मी का पारा ज़्यादा गर्म है या सरकारी अफ़सरों और नेताओं का 'एसी' वाला रवैया? अपनी बेबाक राय नीचे कमेंट बॉक्स में ठोकिए और इस पोस्ट को दबाकर शेयर कीजिए!"
जनसरोकार की खबरें, आप तक!
✍️ सुरेन्द्र यादव 📞 मोब. 7987825500

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