संडे की सुर्खी: तीखी नजर मीठी मिर्ची (एडिशन-3) : ​​बिलासपुर में 'आत्मनिर्भर' आंदोलन: पुलिस की लाठी से पहले ही विधायक जी ने खुद फाड़ डाला अपना कुर्ता!




 संडे की सुर्खी: तीखी नजर मीठी मिर्ची (एडिशन-3)



​​बिलासपुर में 'आत्मनिर्भर' आंदोलन: पुलिस की लाठी से पहले ही विधायक जी ने खुद फाड़ डाला अपना कुर्ता!






कहते हैं कि राजनीति में सहानुभूति (सिम्पैथी) बटोरने के लिए अक्सर सामने वाले पर आरोप लगाना सबसे आसान रास्ता होता है। लेकिन बिलासपुर में नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर हुए NSUI के प्रदर्शन में कैमरे की 'तीखी नजर' ने सारा खेल ही बिगाड़ दिया। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा वीडियो तेजी से तैर रहा है, जिसे देखकर लोग अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं।

​टिप्पणी: 


अमूमन किसी भी बड़े आंदोलन में यह देखने को मिलता है कि नेताजी चिल्लाते हैं—"देखो, पुलिस ने बर्बरता की, मेरे कपड़े फाड़ दिए!" लेकिन बिलासपुर के इस उग्र प्रदर्शन में हमारे माननीय विधायक देवेंद्र यादव जी ने पुलिस की लाठी या धक्का-मुक्की का इंतजार करना मुनासिब नहीं समझा। उन्होंने वक्त की नजाकत को देखा और 'ऑन-द-स्पॉट' आत्मनिर्भरता का परिचय देते हुए खुद ही अपने हाथों से अपना कुर्ता फाड़ डाला!


​इसे ही कहते हैं—'अपना काम स्वयं करें'। 


विधायक जी ने सोचा होगा कि जब तक पुलिस वाले कुर्ते तक पहुंचेंगे, तब तक प्रदर्शन का टाइम निकल जाएगा, इसलिए खुद ही काम तमाम कर दिया जाए। कुर्ता फाड़ने के बाद वे जिस उग्रता से खाकी के सामने सीना तानकर खड़े हुए, उसे देखकर तो न्यूटन का मोशन लॉ भी शर्मा जाए।

​खैर, विधायक जी की इस 'कुर्ता फाड़' आत्मनिर्भरता ने जनता को मनोरंजन का एक तगड़ा डोज दे दिया है। अब देखना यह है कि इस वायरल सच के सामने आने के बाद कांग्रेस आलाकमान इस 'सेल्फ-सर्विस' पर क्या प्रतिक्रिया देता है!


​1. महासमुंद में किसानों की 'हुंकार' और बोइरगांव की 'किस्तबाजी'


   



​सबसे पहले बात हमारे अन्नदाता की। महासमुंद की सड़कों पर हज़ारों पैरों की धमक ने इस हफ्ते व्यवस्था की नींद उड़ा दी। किसान कांग्रेस के बैनर तले उमड़ा यह जनसैलाब सीधे सरकार के सामने 9 कड़े सवाल दाग रहा था। उधर बोइरगांव सोसायटी में तो किसानों का सब्र ही टूट गया और उन्होंने सीधे दफ्तर का घेराव कर दिया।



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कमाल की व्यवस्था है! जब खेत को खाद की जरूरत है, तब हमारी सरकार उसे 'किस्तों' में देकर किसानों का मजाक उड़ा रही है। अरे साहब! क्या किसान का खेत भी किस्तों में फसल देता है? ऊपर से जेरीकेन में डीजल लेने पर पाबंदी! ऐसा लगता है जैसे सरकार चाहती ही नहीं कि किसान शांति से खेती कर सके। जब बोने का समय आता है, तब सरकारी फाइलें कछुए की चाल चलती हैं। अब देखना यह है कि बहरे सिस्टम के कान तक यह हुंकार पहुंचती है या इसे भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा।




​2. पर्यावरण दिवस: एक बेचारा पौधा और दस-दस 'फोटोजीवी' मालिक!


  



​अब बात करते हैं अभी-अभी बीते 'विश्व पर्यावरण दिवस' की। इस दिन हमारे इलाके में हरियाली कम, 'फोटोशूटी' क्रांति ज्यादा देखने को मिली। हर सरकारी-गैरसरकारी दफ्तर और चौक-चौराहों पर एक ही नजारा था—पौधा बेचारा एक अकेला मासूम, और उसे पकड़कर पोज देने वाले 'पर्यावरण प्रेमी' दस-दस!


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गजब का प्रेम है भाई! जब तक कैमरे की फ्लैश चमकती रही, तब तक पौधे को ऐसे थामा गया जैसे वो देश की जीडीपी बढ़ा रहा हो। लेकिन जैसे ही फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड हुई, साहब लोग अपनी गाड़ियों में एसी ऑन करके चलते बने। आज वो बेचारे पौधे तहसीलों और दफ्तरों के कोनों में 'अनाथ' की तरह खड़े पानी की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। अरे साहब, पेड़ लगाना सिर्फ 'इमोशनल अत्याचार' और फेसबुक पर लाइक बटोरने का जरिया नहीं है, उसे पालना भी पड़ता है। अगर सिर्फ फोटो ही खिंचवानी थी, तो प्लास्टिक का ही पौधा लगा लेते, कम से कम वो बिना पानी के मरता तो नहीं!



​3. सांकरा थाना: खाकी का कड़क 'नोट-प्रबंधन'

    

       



​"मित्र पुलिस" का दम भरने वाली हमारी खाकी का एक और शानदार कारनामा सोशल मीडिया के गलियारों में तैर रहा है। मामला जिला महासमुंद के सांकरा थाने का है, जहाँ एक आरक्षक महाशय वर्दी की गरिमा को ताक पर रखकर कैमरे के सामने कड़क नोट गिनते हुए कैद हुए हैं।



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आरोप है कि कानून के मुताबिक जो 103 पन्नों की चालान कॉपी पीड़ित को बिल्कुल 'मुफ्त' मिलनी थी, उसके लिए आरक्षक साहब ने ₹2500 का 'फोटोकॉपी टैक्स' वसूल लिया। और तो और, पैसे न देने पर कोर्ट-थाने के चक्कर लगवाने की धमकी भी दे डाली। हद तो तब हो गई जब पीड़ित शिकायत करने पिथौरा थाने पहुंचा, तो वहाँ भी मामले को दबाने का 'सिस्टमैटिक' दबाव बनाया गया। 'तीखी नजर' का सीधा सवाल है—क्या इस वायरल सच पर कोई कड़ा एक्शन होगा या हमेशा की तरह 'जांच' का झुनझुना थमाकर सच को दफन कर दिया जाएगा? जब रक्षक ही जेब काटने लगें, तो आम आदमी कहाँ जाए?



4. सक्ती चौकी: आदेश का 'अक्षरशः' पालन करने वाला ड्राइवर!


    


​चलते-चलते एक ऐसी खबर पर नजर डाल लेते हैं जिसे देखकर कानून के लंबे हाथों पर भी हंसी आ जाए। सक्ती जिले से एक भारी-भरकम रेत-गिट्टी से लदे ट्रक की तस्वीर वायरल है। यह ट्रक किसी नो-पार्किंग में नहीं, बल्कि सीधे पुलिस चौकी के मुख्य द्वार और सीढ़ियों को तोड़ते हुए थाने के भीतर जा घुसा है।



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इंटरनेट की जनता इस पर जमकर चटखारे ले रही है। लोग लिख रहे हैं—"थानेदार साहब ने फोन पर कड़क कर कहा होगा: गाड़ी लेकर तुरंत थाने हाजिर हो! बस, हमारे ड्राइवर भाई ने न आव देखा न ताव, गाड़ी सीधे साहब की कुर्सी के बगल में ही पार्क कर दी!" जब ट्रक ने सिंघम स्टाइल में एंट्री मारी, तो गेट पर लिखा बोर्ड—"आपकी सेवा में सदैव तत्पर"—सीधे ट्रक के केबिन को चूम रहा था। जनता कह रही है कि यह है असली 'होम डिलीवरी'—जब पुलिस चालान काटने नहीं आई, तो ड्राइवर खुद चालान कटवाने चौकी के अंदर घुस गया। भले ही यह ब्रेक फेल होने का हादसा था, लेकिन इस 'स्मार्ट वीआईपी पार्किंग' ने जनता को हंसने का तगड़ा डोज दे दिया है।



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