महासमुंद
अगर आप किसी स्कूल, कॉलेज या कोचिंग सेंटर के पास खड़े होकर धुएं के छल्ले बना रहे हैं या जेब से 'सुरती' निकालकर हथेली पर रगड़ रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! अब आपके इस
"धुआंधार" टैलेंट पर ग्रहण लगने वाला है।
कलेक्ट्रेट सभागार में सोमवार को 'नशामुक्त भारत अभियान' के तहत जिला स्तरीय समिति की एक ऐसी कड़क बैठक हुई, जिसने नशे के सौदागरों और शौकीनों का 'सिस्टम' हिलाकर रख दिया है। कलेक्टर विनय कुमार लंगेह साहब ने साफ-साफ कह दिया है कि अब जिले को नशामुक्त बनाने के लिए कड़े नहीं, बल्कि 'महा-कड़े' कदम उठाए जाएंगे।
🚫 100 मीटर का "नो-धुआं ज़ोन"
प्रशासन ने फीता लेकर नापने की तैयारी कर ली है। किसी भी स्कूल या कॉलेज के 100 मीटर के दायरे में सिगरेट, बीड़ी, गुटखा या किसी भी तरह के मादक पदार्थ की बिक्री पर "पूर्ण लॉकडाउन" रहेगा। यानी अब शिक्षण संस्थानों के पास 'गुमटी' लगाकर धुआं बेचने वालों पर कानून का डंडा ऐसा चलेगा कि सीधे 'चालान कटेगा'। कोटपा अधिनियम (तंबाकू नियंत्रण कानून) के नियमों को इतनी सख्ती से लागू किया जा रहा है, जैसे एग्जाम में इनविजिलेटर नकल पकड़ता है!
🕵️♂️ खुफिया नजर और 'मेडिकल स्टोर' का एक्स-रे
सिर्फ गुटखा-सिगरेट ही नहीं, मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली नशीली दवाइयों की अवैध बिक्री को रोकने के लिए प्रशासन अब 'खुफिया' जानकारी जुटाएगा। मतलब, जो लोग दवाई के नाम पर 'नशा' बेच रहे हैं, उनके पीछे अब गुप्तचर लग चुके हैं। पकड़े गए तो सीधी जेल की हवा खानी पड़ेगी।
🧑की 'मास्टर वॉलंटियर' और 'नोडल गुरुजी'
अब इस अभियान की सबसे मजेदार और तगड़ी रणनीति सुनिए!
नोडल अधिकारी (गुरुजी): स्कूल के एक टीचर को 'नोडल अधिकारी' की कमान सौंपी जाएगी। अब गुरुजी सिर्फ गणित या विज्ञान नहीं पढ़ाएंगे, बल्कि क्लास के 'बैकबेंचर्स' और बाहर चक्कर काटने वालों पर 'तीखी नजर' रखेंगे।
बाल जासूस (मास्टर वॉलंटियर): बच्चों को बचपन से ही नशे के दुश्मनों को पहचानने की ट्रेनिंग दी जाएगी। स्कूल के बच्चे अब 'मास्टर वॉलंटियर' बनेंगे। यानी अगर कोई साथी छात्र या कोई बाहर वाला गड़बड़ करता दिखा, तो ये 'छोटे जासूस' तुरंत उसकी क्लास लगा देंगे या गुरुजी को रिपोर्ट सौंप देंगे।
इस महा-अभियान में सिर्फ बच्चे नहीं, बल्कि अभिभावकों (माता-पिता) और शिक्षकों को भी आपस में 'तालमेल' बिठाना होगा। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा और रवि साहू सहित पूरी समिति के सचिव और सदस्य बिल्कुल 'एक्शन मोड' में नजर आए।
जनहित में जारी चेतावनी:
तो भैया, सीधे शब्दों में समझ लीजिए... अब "गुटखा थूकना" और "धुआं उड़ाना" सेहत के साथ-साथ जेब और इज्जत दोनों के लिए हानिकारक होने वाला है। सुधर जाइए, क्योंकि अब बच्चों की 'तीखी नजर' आप पर ही है!

Post a Comment