चाबुक: अघोषित कटौती पर बिजली विभाग को लगी तगड़ी फटकार, अब फोन नहीं उठाया तो खैर नहीं!


    




महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह का सख्त निर्देश— 'बिजली गुल हुई तो जनता को पहले बताओ बहाली का टाइम, उपभोक्ताओं के कॉल को नजरअंदाज करने वाले बाबू नपेंगे!'



​महासमुंद / तिखी नज़र 



बागबाहरा सहित पूरे महासमुंद जिले में 'बिजली रानी' की अघोषित आंख-मिचौली और बिजली दफ्तर के बाबू लोगों की 'कुंभकर्णी नींद' पर आखिरकार जिला कप्तान का हंटर चल ही गया है! जिले में सुशासन और जनसुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से महासमुंद के कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने मंगलवार सुबह वर्चुअल मोड में समय-सीमा की एक अहम समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में अपर कलेक्टर रवि साहू सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे।

​बैठक में कलेक्टर साहब ने साफ लहजे में कह दिया है कि आम जनता की समस्याओं का समय-सीमा के भीतर और गुणवत्तापूर्ण निराकरण हर हाल में सुनिश्चित होना चाहिए।



📞 फोन उठाने से 'परहेज' करने वाले बाबुओं पर गिरेगी गाज!




​बैठक में जिले के भीतर हो रही अघोषित बिजली कटौती को एक गंभीर मुद्दा मानते हुए विद्युत विभाग के अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई गई और उन्हें सख्त निर्देश जारी किए गए। कलेक्टर लंगेह ने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर किसी इलाके में बिजली आपूर्ति बंद होती है, तो विभाग पहले से नागरिकों को कटौती का कारण और बिजली बहाली का संभावित समय बताए।

​इसके साथ ही उन्होंने बिजली विभाग के 'फोन न उठाने' के ढर्रे पर गहरी नाराजगी जताते हुए निर्देशित किया कि अधिकारी उपभोक्ताओं के फोन कॉल को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और शिकायतों पर तत्काल प्रतिक्रिया (रिस्पॉन्स) दें।



​"तिखी नज़र का सीधा प्रहार


अब तक तो विभाग के बाबू लोग 'रिंगटोन' सुनकर भी अनजान बने रहते थे, लेकिन अब कलेक्टर साहब के इस आदेश के बाद अगर किसी बाबू ने 'कॉल इग्नोर' किया, तो उनका खुद का 'सिस्टम शॉर्ट-सर्किट' होना तय है!"



​💻 सुशासन तिहार के आवेदनों पर अल्टीमेटम और 'ई-फाइल' राज!



​कलेक्टर साहब की पैनी नजर सिर्फ बिजली विभाग पर ही नहीं, बल्कि दफ्तरों में धूल खा रही फाइलों पर भी रही। बैठक में 'सुशासन तिहार' के लंबित प्रकरणों की समीक्षा की गई। जिले में आयोजित हुए कुल 37 शिविरों में 30,493 आवेदन मिले थे, जिनमें से 14,396 आवेदन अभी भी पेंडिंग हैं। कलेक्टर ने सभी विभागों के सुस्त अफसरों को चेतावनी देते हुए इसी सप्ताह के भीतर इन लंबित मामलों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निपटारा करने को कहा है।


​बड़ा बदलाव यह भी है कि जिले में 1 जून से 'ई-फाइल' प्रणाली को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। अब कागजी फाइलों का संचालन प्रतिबंधित रहेगा। यानी अब बाबू लोग यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकते कि—"साहब, आपकी फाइल गुम हो गई है!" अब हर काम कंप्यूटर की स्क्रीन पर 'ऑन रिकॉर्ड' रहेगा।

​इसके अलावा, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन योजना 1076 के तहत अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देकर पूरी तरह अलर्ट रहने को कहा गया है। साथ ही पीएचई (PHE) और नगरीय निकायों को भी सख्त हिदायत दी गई है कि इस भीषण गर्मी में नागरिकों को शुद्ध व स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हर हाल में मिले।



​🚜 30 जून तक गांवों में डेरा डालेगा कृषि विभाग



​किसानों के हित में भी कलेक्टर ने बड़ा फैसला सुनाया है। आगामी 30 जून तक कृषि विभाग द्वारा 'विशेष खेती बचाओ अभियान' चलाया जा रहा है। इसके तहत कृषि विभाग का मैदानी अमला अब दफ्तरों में बैठकर आराम करने के बजाय सीधे गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेगा। सहकारी समितियों में यूरिया और डीएपी खाद लेने पहुंच रहे किसानों को बिना किसी परेशानी के निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाएगी।



​👀 तिखी नज़र का अंतिम निचोड़



​कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बिजली से लेकर पानी और खाद तक के मुद्दों पर अफसरों की चूड़ियां तो कस दी हैं। अब देखना यह है कि कलेक्टर साहब के इस 'हाई वोल्टेज' हंटर का असर बिजली विभाग के उन लापरवाह कर्मचारियों पर कितना पड़ता है, जो जनता के फोन को खिलौना समझते थे।



​बिजली विभाग के शूरवीरों! अब संभल जाओ... क्योंकि अगर अब किसी उपभोक्ता का फोन बिना उठे कट गया, तो कलेक्टर साहब की 'फाइल' सीधे आपके सस्पेंशन का करंट लेकर आ सकती है!



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