छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस का बड़ा ऐलान— 4 जून को जिला मुख्यालय में गूंजेगा अन्नदाता का हल्लाबोल, मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
एक तरफ जहां प्रशासन सुशासन के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ खरीफ सीजन की शुरुआत होते ही महासमुंद जिले का अन्नदाता अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हो गया है। सहकारी समितियों (सोसायटियों) में पर्याप्त खाद की किल्लत और खेती-किसानी से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस के आह्वान पर 4 जून (गुरुवार) को महासमुंद जिला मुख्यालय में एक विशाल किसान रैली और उग्र प्रदर्शन का शंखनाद होने जा रहा है।
इस आंदोलन के जरिए जिलेभर के किसान एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को अपनी मांगों का पुलिंदा (ज्ञापन) सौंपेंगे।
⏱️ गुरुवार सुबह 11 बजे 'कांग्रेस भवन' में जुटेंगे किसान
किसान कांग्रेस के मुताबिक, इस महा-प्रदर्शन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुरुवार सुबह 11 बजे जिलेभर के कोने-कोने से किसान और कांग्रेस कार्यकर्ता 'कांग्रेस भवन महासमुंद' में इकट्ठा होंगे। वहां एक संक्षिप्त आमसभा होगी, जिसके ठीक बाद सभी प्रदर्शनकारी एक शांतिपूर्ण लेकिन बेहद असरदार रैली की शक्ल में कलेक्टोरेट कार्यालय की तरफ मार्च करेंगे।
दिग्गजों की मौजूदगी:
इस बड़े किसान आंदोलन की अगुवाई करने छत्तीसगढ़ प्रदेश किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा मुख्य रूप से महासमुंद पहुंच रहे हैं। उनके साथ प्रदेश द्वारा नियुक्त जिला कार्यक्रम प्रभारी राजेश पाण्डेय, राजेश मुखर्जी और सौरभ सिंह भी उपस्थित रहकर किसानों की आवाज बुलंद करेंगे और सभा को संबोधित करेंगे।
🤔 आखिर क्यों फूटा है किसानों का गुस्सा? ये हैं मुख्य मांगें:
अन्नदाताओं ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से होगा, लेकिन सरकार के सामने अपनी इन जरूरी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा जाएगा:
🌾 सोसायटियों में पर्याप्त खाद:
खरीफ सीजन सिर पर है, किसानों को सोसायटियों में चक्कर काटने के बाद भी पर्याप्त खाद नहीं मिल पा रही है, इसे तुरंत सुधारा जाए।
⚡ निर्बाध बिजली आपूर्ति:
खेती-किसानी के काम के लिए बिना किसी रुकावट (नो ट्रिपिंग) के 24 घंटे सुचारू बिजली दी जाए।
💰 सरल कृषि ऋण: किसानों को मिलने वाले लोन की प्रक्रिया को पेचीदा बनाने के बजाय बेहद सरल और सुलभ किया जाए।
🛡️ फसली बीमा का सही लाभ:
फसल बीमा की राशि और दावों का निपटारा समय पर हो, ताकि नुकसान होने पर किसान कर्ज के दलदल में न फंसे।
⚖️ सही समर्थन मूल्य: फसलों का सही और वाजिब समर्थन मूल्य जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जाए।
👀 तिखी नज़र का अंतिम निचोड़
कलेक्टर साहब ने अभी कल ही बैठक लेकर अफसरों को अलर्ट किया था, लेकिन जमीन पर सोसायटियों के चक्कर काट-काटकर किसान थक चुके हैं। अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है, तभी तो खेती का सीजन शुरू होते ही किसान को हल छोड़कर कलेक्टोरेट घेरने आना पड़ रहा है।
अब देखना यह है कि कल कलेक्टोरेट के घेराव के बाद सोसायटियों में खाद की बोरियां पहुंचती हैं या फिर किसान सिर्फ आश्वासन की 'बोरी' लेकर वापस लौटता है!

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