क्या महासमुंद के अन्नदाता को महज़ एक 'वोट बैंक' समझ लिया गया है?
कल 4 जून, 2026 को महासमुंद की सड़कों पर हज़ारों पैरों की धमक ने बता दिया कि अब किसान चुप बैठने वाला नहीं है। कांग्रेस भवन से लेकर SDM कार्यालय तक किसान कांग्रेस के बैनर तले उमड़ा जनसैलाब सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि उन कुरीतियों के खिलाफ एक 'हुंकार' थी, जो हमारे किसान भाइयों को हर साल घुटनों पर ले आती हैं।
ये 9 सवाल, जो सत्ता के गलियारों में मचाएंगे खलबली:
- खाद का 'तुगलकी फरमान' क्यों?
- क्या खाद अब राशन की दुकान की मोहताज है? एक एकड़ में कटौती का आदेश तुरंत वापस हो।
- तीन बार में खाद, या मज़ाक?
- छोटे हो या बड़े, किसान को अपनी फसल के लिए एकमुश्त खाद का अधिकार है, किस्तों की भीख नहीं।
- डीजल-पेट्रोल पर पाबंदी का खेल:
- जेरीकेन में तेल देने पर रोक लगाकर क्या सरकार खेती रोकना चाहती है? यह पाबंदी हटाओ, किसान को सुलभ ईंधन का हक दो।
- बिजली के बढ़ते दाम, किसानों के नाम:
- कृषि बिजली महंगी, और वादे मुफ्त के? यह दोमुंहापन बंद हो।
- कालाबाज़ारी का का कड़वा सच :
- पूरे प्रदेश में खाद की एक ही दर हो, वरना बिचौलियों की यह मौज हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
- ऋण का दायरा बढ़ाओ:
- महंगाई के इस दौर में 40,000 प्रति एकड़ ऋण समय की ज़रूरत है, इसे तुरंत लागू किया जाए।
- भुगतान में देरी, पेट पर लात:
- धान और कृषि उपज की राशि का भुगतान 'टुकड़ों-टुकड़ों' में क्यों? हमें हमारा हक़ एकमुश्त चाहिए।
- पारदर्शिता कहाँ है?
- सरकारी योजनाओं की फाइलों में धूल जम रही है और अनुदान लटके हुए हैं। हिसाब चाहिए, और आज ही चाहिए!
हमारी 'तीखी नज़र' का साफ़ संदेश:
SDM कार्यालय तक की इस रैली में किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर हर एक कार्यकर्ता और सम्मानित किसान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महसमुंद का किसान अब अपनी आवाज़ दबाने नहीं देगा।
जनता से सवाल:
क्या आपको लगता है कि प्रशासन इन 9 मांगों को गंभीरता से लेगा या यह भी सिर्फ एक और 'प्रदर्शन' बनकर रह जाएगा? अपनी राय कमेंट में बेबाकी से रखें, क्योंकि चुप्पी ही समस्या की जड़ है!

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