​बागबाहरा मंडी में 'खेती बचाओ अभियान' का महाकुंभ: भाजपा नेताओं के नेतृत्व में उमड़ा किसानों का जनसैलाब, जैविक खेती पर गहन मंथन

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        बागबाहरा 



 बागबाहरा मंडी प्रांगण में आज 'खेती बचाओ अभियान' के तहत आयोजित कार्यक्रम ने एक ऐतिहासिक रूप ले लिया। कृषि को समृद्ध बनाने और मिट्टी की सेहत सुधारने के संकल्प के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ-साथ हजारों किसानों की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि बागबाहरा का किसान अब जागरूक हो रहा है।




भव्य उपस्थिति ने बढ़ाया उत्साह



कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ शासन के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल ने मुख्य अतिथि के रूप में किसानों को जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने का गुरुमंत्र दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महासमुंद की लोकप्रिय सांसद रूपकुमारी चौधरी ने की। मंच पर पूर्व सांसद, पूर्व विधायक सहित भाजपा किसान मोर्चा के समस्त पदाधिकारी व भाजपा कार्यकर्ताओं का हुजूम मौजूद था, जिसने इस आयोजन को एक नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम में उमड़ी हजारों किसानों की भीड़ भाजपा के प्रति अटूट विश्वास और कृषि सुधार के प्रति उनकी उत्सुकता को दर्शा रही थी।




मंत्री जी का संकल्प और किसानों का यथार्थ




मंत्री दयाल दास बघेल ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि जैविक खेती न केवल मिट्टी को जहर मुक्त करेगी, बल्कि किसान की लागत को कम कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी। उन्होंने किसानों से चरणबद्ध तरीके से इस दिशा में कदम बढ़ाने का आग्रह किया।




किसानों के सुझाव: सुरक्षा और रोडमैप पर हो काम




कार्यक्रम की भव्यता के बीच, वहां उपस्थित जागरूक किसानों ने अपनी व्यावहारिक चुनौतियों को भी साझा किया। किसानों का मानना है कि जैविक खेती के प्रति उनका रुझान तब और बढ़ेगा जब:



​उत्पादन सुरक्षा का भरोसा मिले: शुरुआती वर्षों में उत्पादन में होने वाली संभावित कमी की भरपाई के लिए सरकार की ओर से एक स्पष्ट प्रोत्साहन योजना हो।

​ठोस रोडमैप का निर्माण: सिर्फ जागरूकता ही नहीं, बल्कि जैविक फसल के लिए सुनिश्चित मार्केट लिंकेज और आर्थिक सहायता का एक रोडमैप तैयार हो।

​किसानों का सशक्तिकरण: किसान स्वयं रिस्क लेकर जैविक खेती की शुरुआत करने को तैयार हैं, लेकिन शासन के साथ एक सकारात्मक संवाद और मदद उन्हें और अधिक बल देगा।




तीखी नजर: ग्राउंड रिपोर्ट का जमीनी निष्कर्ष


​बागबाहरा मंडी प्रांगण में आज किसानों की भीड़ और कृषि चिंतन का अनूठा संगम देखने को मिला। मंच पर भाजपा के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा और नीचे हजारों किसानों का विश्वास—यह साफ है कि सरकार 'खेती बचाओ अभियान' को मिशन मोड पर ले आई है।



तीखी नजर का  निष्कर्ष:



​आज के आयोजन ने दो बड़ी हकीकतें सामने रख दी हैं। पहला, भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों का जोश बताता है कि वे जमीन पर बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं दूसरी कड़वी सच्चाई यह है कि किसान अब केवल नारों से संतुष्ट होने वाला नहीं है।

​मंत्री दयाल दास बघेल ने मंच से 'जैविक क्रांति' का जो संकल्प फूंका है, वह तब तक अधूरा है जब तक उसे 'आर्थिक सुरक्षा' का कवच न मिले। मंच से मिली सलाह सराहनीय है, लेकिन किसानों के मन में दबी जुबान से उठ रहे सवाल—कि "शुरुआती घाटे का क्या?"—यह सरकार के लिए असली परीक्षा है।



हमारी नजर में:



सरकार ने मंच सजा दिया है, और जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को भव्यता दी है, इसमें कोई संदेह नहीं। लेकिन 'तीखी नजर' का स्पष्ट मानना है कि अगर किसान को जैविक खेती के लिए प्रेरित करना है, तो सिर्फ प्रेरणा नहीं, 'प्रोत्साहन राशि' और 'मार्केट का गारंटी कार्ड' देना होगा।

​किसान अगर अपना खेत और फसल रिस्क पर लगा रहा है, तो सरकार को भी अपना 'रोडमैप' साफ करना होगा। जैविक खेती का सपना तभी हकीकत बनेगा, जब किसान के हाथ में खाद-बीज के साथ-साथ 'सुरक्षा' का पक्का भरोसा होगा। भाजपा का यह अभियान सफल तब माना जाएगा, जब अंतिम पंक्ति में खड़े किसान के खेत में 'जैविक' का मुनाफा भी दिखेगा और उसकी लागत भी कम होगी।

​सीधी बात, नो…….खेती बचानी है, तो किसान को आर्थिक रूप से पहले बचाना होगा!



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