कोमाखान,
कोमाखान क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का एक ऐसा 'मॉडल' सामने आया है, जो न केवल प्रशासनिक नियमों की धज्जियाँ उड़ा रहा है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य और हक के साथ भी खिलवाड़ कर रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पंचायत में सरकारी प्रमाण पत्रों (जाति, निवास आदि) पर हस्ताक्षर के नाम पर ग्रामीणों से सरेआम अवैध वसूली की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच द्वारा इस वसूली के लिए जनपद के फर्जी आदेशों का हवाला दिया जा रहा है। 'तीखी नजर न्यूज़' के पास मौजूद साक्ष्य इस पंचायत में चल रही गहरी अनियमितताओं की ओर इशारा करते हैं।
दस्तखत के नाम पर 'रेट कार्ड' और वसूली
पंचायत का काम जनता की सेवा करना है, लेकिन यहाँ दस्तखत करने के बदले खुलेआम पैसे मांगे जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्येक प्रमाण पत्र के लिए उनसे अनुचित शुल्क लिया जा रहा है, और विरोध करने पर जनपद के आदेश का झूठा डर दिखाया जाता है। यह न केवल अनैतिक है, बल्कि पद का सीधा दुरुपयोग भी है।
*धरातल पर हकीकतनाडेप तोड़ने का तर्कहीन अभियान*
(अलग अलग जगहों का नाडेप की तस्वीर जहाँ पहले नाडेप सलामत था )
अवैध वसूली के साथ-साथ यहाँ एक अजीबोगरीब अभियान भी चल रहा है, जहाँ सही सलामत और उपयोगी संरचनाओं को निशाना बनाया जा रहा है। गांव के चौक-चौराहों पर स्वच्छता के लिए निर्मित नाडेप को जानबूझकर तोड़ा गया है। इन संरचनाओं के ध्वस्तीकरण के कारण अब ग्रामीण कचरा खुले में फेंकने को मजबूर हैं, जो गांव में गंदगी और बीमारियों को न्योता दे रहा है।
ट्रैक्टर 'ट्रिप' और भुगतान का शोषण
मामला केवल निर्माण तोड़ने तक सीमित नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि जिन ट्रैक्टर मालिकों ने काम किया, उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला है। क्या सरकारी खजाने से पैसा निकल चुका है और असली कामगार आज भी अपने मेहनताने के लिए संघर्ष कर रहे हैं?
जिम्मेदारों के 'गोल-मोल' जवाब
कहते हैं सचिवक्या
: जब हमने सचिव से पूछा, तो उनका कहना था— "मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं है, नाडेप टूटने के बाद ही मुझे मालूम हुआ है।
क्या कहती हैं सरपंच
दस्तखत के नाम पर पैसे लेने के आरोपों पर सरपंच का दावा है कि— "उनके द्वारा किसी प्रमाण पत्र के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता।" जबकि वीडियो फुटेज में वे स्वयं ग्रामीण से पैसे लेती और जनपद के आदेश का हवाला देती साफ नजर आ रही हैं। वहीं, नाडेप तोड़ने के मामले पर उनका कहना है— "इस विषय में मुझे मालूम नहीं, सचिव जानेंगे।"
बिल का बहाना
ट्रैक्टर मालिकों को भुगतान न करने पर सरपंच का तर्क है कि वे इसलिए भुगतान नहीं कर रहे क्योंकि ट्रैक्टर मालिकों के पास कोई 'प्रिंटेड बिल वाउचर' नहीं है।
तीखी नजर के सीधे सवाल
अवैध वसूली क्यों?
यदि प्रमाण पत्र निशुल्क हैं, तो वीडियो में जनपद के नाम पर पैसे की मांग क्यों की जा रही है?
सरकारी संपत्ति का नुकसान: यदि सरपंच को जानकारी नहीं थी, तो पंचायत की संपत्ति किसकी अनुमति से तोड़ी गई?
ग्रामीणों के साथ तीखी नजर
यह रिपोर्ट केवल एक खबर नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ सवाल है जो ग्रामीणों की मेहनत की कमाई को 'चिलहर भ्रष्टाचार' में बदल रही है। 'तीखी नजर न्यूज़' उन सभी साक्ष्यों को सुरक्षित रखता है, जो इस मामले की सच्चाई उजागर करने के लिए पर्याप्त हैं।
तीखी नजर की निगाहें अब अगले कदम पर हैं!
Note हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि पंचायत की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और सुधार लाना है। वर्तमान में ग्रामीणों की गोपनीयता और लोक-हित को ध्यान में रखते हुए हमने संबंधित पंचायत और पदाधिकारियों के नामों को सार्वजनिक नहीं किया है। हम उम्मीद करते हैं कि इस रिपोर्ट के बाद संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार लाएंगे। यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो 'तीखी नजर न्यूज़' जनहित में मजबूरन सभी पुख्ता साक्ष्यों के साथ पंचायत और संबंधित व्यक्तियों के नामों का खुलासा करने के लिए बाध्य होगा।"


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