विधायक कॉलोनी' के लिए 'बेघर' हुए गरीब: रायपुर में बुलडोजर का राज, गरीबों का आशियाना या वीआईपी का महल ?

 

    





रायपुर:


राजधानी के नकटी गांव में सोमवार को जो हुआ, उसे 'विकास' कहें या 'विनाश', यह आप ही तय करें। 4000 पुलिसवालों का लाव-लश्कर और 14 बुलडोजरों का काफिला जब एक बस्ती में उतरा, तो ऐसा लगा मानो किसी बहुत बड़े युद्ध की तैयारी हो। पर असल में लड़ाई थी  साहबों के लिए 'विधायक कॉलोनी' बनाने की।



सवाल तो यह है कि सरकारी जमीन पर कब्जा 'अवैध' तब क्यों नहीं था, जब इन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा था?



​प्रशासन ने 80 परिवारों को 48 घंटे का 'अल्टीमेटम' दिया था। अब 80 परिवार खुले आसमान के नीचे हैं। प्रशासन का तर्क है कि जमीन 'सरकारी' थी। वाह! मतलब, जब तक वोट चाहिए थे, तब तक यही जमीन 'लोकतंत्र' थी, और जब विधायकों के लिए आलीशान कॉलोनी बनानी हुई, तो जमीन 'सरकारी' हो गई!



गरीबों के आशियाने पर बुलडोजर, वीआईपी के लिए रेड कार्पेट ?



विधानसभा में जब सवाल उठा कि क्या विधायकों के लिए जमीन है, तो राजस्व मंत्री जी ने इशारा किया और बुलडोजर चल पड़े। क्या विधायकों की नींद अब केवल गरीबों की बस्ती उजड़ने के बाद ही पूरी होगी?

​ग्रामीण पूछ रहे हैं "अगर हम अवैध थे, तो बिजली-पानी और सरकारी योजनाओं का लाभ हमें कैसे मिला?" पर प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं है। उनके पास जवाब के नाम पर सिर्फ 14 बुलडोजर हैं, जो बोल नहीं सकते, बस 'ढहा' सकते हैं।


पुनर्वास का 'जुमला'


प्रशासन अब 'नया रायपुर' में मकान देने का दावा कर रहा है। पर सवाल यह है कि जो लोग बरसों से अपनी मिट्टी से जुड़े थे, उन्हें कंक्रीट के किसी बक्से में शिफ्ट करके क्या आप उनका घर वापस दे पाएंगे?


'तीखी नजर' का सवाल 



विधायकों की कॉलोनी के लिए आम आदमी का बेघर होना क्या इसी 'सुशासन' का हिस्सा है? क्या हमारे चुने हुए नुमाइंदे अब जनता की जमीन पर ही अपना महल खड़ा करेंगे?

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