महासमुंद।
देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और विदेशों से चीनी आयात की स्थिति को लेकर महिला कांग्रेस महासमुंद की अध्यक्ष सुश्री दुर्गा सागर ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इथेनॉल नीति का असर अब चीनी के उत्पादन और आम जनता की रसोई के बजट पर दिखाई देने लगा है।
सुश्री दुर्गा सागर ने कहा कि गन्ने की बड़ी मात्रा का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब गन्ने का एक बड़ा हिस्सा चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल निर्माण में इस्तेमाल होगा, तो चीनी का उत्पादन प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण चीनी मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध कराने की स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर देश में गन्ने का उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर चीनी की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अब विदेशों से चीनी आयात करने की जरूरत पड़ रही है। यह स्थिति सरकार की नीति और उसके दूरगामी प्रभावों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
दुर्गा सागर ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जब देश में गन्ने का उत्पादन होता है, तो चीनी के उत्पादन और घरेलू बाजार की जरूरतों के बीच संतुलन क्यों नहीं बनाया जा सका। यदि घरेलू उत्पादन प्रभावित होने से आयात की जरूरत पड़ रही है, तो इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ अंततः आम उपभोक्ता पर ही पड़ता है।
उन्होंने कहा कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की रसोई पर पड़ता है। चाय से लेकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों तक चीनी रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तु है। ऐसे में इसकी कीमत में बढ़ोतरी सीधे आम आदमी के घरेलू बजट को प्रभावित करती है।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से मांग की कि इथेनॉल उत्पादन और चीनी उत्पादन के बीच संतुलन की स्पष्ट नीति बनाई जाए, चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और बढ़ती कीमतों से आम जनता को तत्काल राहत दिलाने के प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनका लाभ आम जनता को मिले, न कि ऐसी परिस्थितियां पैदा हों जहां घरेलू उत्पादन प्रभावित होने के बाद आवश्यक वस्तु के आयात की जरूरत पड़े और उसकी कीमत का बोझ आम उपभोक्ता को उठाना पड़े।

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