महाघोटाले की आहट: छ.ग. वन विभाग में नियमितीकरण के नाम पर 15-15 हजार की खुली लूट, कर्मचारी संघ ने खोला मोर्चा

 





​रायपुर / महासमुंद


छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग में काम करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को पक्की नौकरी का झांसा देकर सरेआम लूटने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभाग में सालों से पसीना बहा रहे वाहन चालकों और अन्य कर्मचारियों से नियमितीकरण (Permanent) के नाम पर 15,000 रुपये प्रति व्यक्ति की अवैध वसूली की जा रही है।  

​इस बड़े फर्जीवाड़े और दलाली के खिलाफ 'वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग वाहन चालक/कर्मचारी संघ छ.ग.' ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष नरेश कुमार यादव और प्रांतीय सचिव हैदर अली ने 16 सितंबर 2026 को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन पहुंचकर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को सीधे तौर पर इस घोटाले की लिखित शिकायत सौंपी है।  

​दलालों का फैलाया हुआ मायाजाल

संघ ने अपने ज्ञापन में खुलासा किया है कि कुछ असामाजिक तत्वों और संगठनों द्वारा कर्मचारियों के बीच खुलेआम यह अफवाह फैलाई जा रही है कि विभाग में केवल उन्हीं कर्मचारियों का नियमितीकरण या स्थायीकरण होगा जो 15,000 रुपये की घूस देंगे। इस झूठे आश्वासन के दम पर अल्प वेतन पाने वाले गरीब कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई लूटी जा रही है।  







​चेतावनी के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा वसूली का खेल




इस मामले में सबसे बड़ी लापरवाही यह सामने आई है कि जंगल सफारी, नया रायपुर कार्यालय द्वारा 19 जून 2026 (पत्र क्रमांक/स्था./265) को पहले ही इस तरह की धोखाधड़ी से सावधान रहने का निर्देश जारी किया गया था। लेकिन इसके बावजूद प्रदेश के अन्य वनमंडलों और कार्यालयों में यह अवैध वसूली बेखौफ जारी है।  



​कर्मचारी संघ की दो टूक मांगें:



संघ ने उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल और कड़े कदम उठाने की मांग की है:  


इस गंभीर मामले की तुरंत जांच हो और अवैध वसूली करने वाले दलालों/संगठनों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।  


​सभी वनमंडलों में यह स्पष्ट आदेश जारी किया जाए कि नियमितीकरण केवल सरकारी नियमों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश से ही होगा। किसी भी बाहरी व्यक्ति या एजेंट को पैसे मांगने का कोई अधिकार नहीं है।  


​कर्मचारियों को जागरूक करने के लिए नया परिपत्र जारी हो और शिकायत मिलने पर गुप्त जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।  



​अब देखना यह है कि अरण्य भवन में बैठे आला अधिकारी इस 'खुली लूट' पर कब चाबुक चलाते हैं और गरीब दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को इन दलालों के चंगुल से कैसे बचाते हैं।

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