रायपुर में भाजपा की ‘सर्जरी’ से सियासत लाल: युवाओं को कमान, दिग्गजों को ‘वानप्रस्थ’; विपक्ष ने कसा तंज- "ये मार्गदर्शक मंडल है या रिटायरमेंट होम?"

      ​रायपुर: chhttisgarh

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संपन्न हुई भाजपा कोर कमेटी की बैठक के बाद प्रदेश का सियासी पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया है। बैठक में भाजपा ने जो 'राजनैतिक सर्जरी' की है, उसकी चीखें अब गलियारों में सुनाई दे रही हैं। एक तरफ जहां पार्टी ने 'नो वन बिलो 40' या यूं कहें कि युवा चेहरों पर दांव लगाते हुए उन्हें नई और भारी-भरकम जिम्मेदारियां सौंप दी हैं, वहीं दूसरी तरफ सालों से पार्टी की कमान संभाले बैठे सूरमाओं के पर कतर दिए गए हैं।

​वरिष्ठ भाजपाइयों को बिना किसी लाग-लपेट के सीधे ‘मार्गदर्शक मंडल’ का रास्ता दिखा दिया गया है। आसान भाषा में कहें तो, "अब आप आराम कीजिए और सिर्फ ज्ञान दीजिए, काम तो लड़के ही संभालेंगे।



​⚡ युवाओं को 'ताज़', बुजुर्गों को 'बनवास'?



​भाजपा के इस अचानक बदले गियर ने सबको चौंका दिया है। कोर कमेटी की बैठक से जो छनकर बाहर आया है, उसने साफ कर दिया है कि भाजपा अब पूरी तरह से 'न्यू लुक' में आने को बेताब है। नए और जोश से लबरेज चेहरों को फ्रंटफुट पर बैटिंग करने के लिए उतार दिया गया है। लेकिन इस बदलाव की सबसे कड़वी घूंट उन सीनियर नेताओं को पीनी पड़ी है, जो कल तक खुद को रेस का घोड़ा मान रहे थे। उन्हें अब ठंडे बस्ते (मार्गदर्शक मंडल) में डाल दिया गया है।

​भीतर की बात: चर्चा तो यह भी है कि इस फैसले से कई 'वरिष्ठों' के चेहरों का रंग उड़ गया है, लेकिन अनुशासन की पट्टी ऐसी बंधी है कि न तो उगलते बन रहा है और न ही निगलते।

​🌶️ विपक्ष का तीखा तंज: "ये मार्गदर्शक मंडल है या रिटायरमेंट होम?

​भाजपा की इस अंदरूनी उथल-पुथल पर नजर गड़ाए बैठे विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। विपक्ष ने बिना वक्त गंवाए इस पर नमक-मिर्च छिड़कना शुरू कर दिया है।

​विपक्षी प्रवक्ताओं ने तीखा तंज कसते हुए कहा:

​"भाजपा अपने ही उन बुजुर्ग नेताओं का 'पॉलिटिकल एनकाउंटर' कर रही है, जिन्होंने खून-पसीना बहाकर पार्टी को खड़ा किया।"

​"यह मार्गदर्शक मंडल नहीं, बल्कि भाजपा का 'रिटायरमेंट होम' है, जहां नेताओं को जबरन वीआरएस (VRS) देकर साइडलाइन कर दिया जाता है।"

​"जिस पार्टी में अपनों का सम्मान नहीं, वो युवाओं का क्या भला करेगी? यह सिर्फ अंदरूनी कलह को छिपाने का एक नया पैंतरा है।"

​🔍 आगे क्या होगा?

​रायपुर की इस बैठक ने यह तो साफ कर दिया है कि भाजपा अब पुरानी केंचुली छोड़ नए तेवर में आने वाली है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या ये 'मार्गदर्शक' चुपचाप मार्ग दिखाएंगे, या फिर भीतर ही भीतर कोई नया 'मार्ग' तलाशेंगे? युवाओं का जोश और बुजुर्गों का रोष... देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा की यह नई स्क्रिप्ट उसे सत्ता के शिखर पर ले जाती है या फिर अंतर्कलह के दलदल में धकेलती है।


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