महासमुंद में 'कागज़ी विकास' की गंगा और सूखी टंकी के सुल्तान!

 


  • "SUNDAY SPACIAL EDITION
  • रविवार विशेष संस्करण"


महासमुंद:


रविवार की सुबह है, सूरज देवता पूरी तल्खी के साथ चमक रहे हैं और हमारे क्षेत्र के कुछ 'सफेदपोश साहब लोग' एसी कमरों में बैठकर जनता के विकास का नया नक्शा बना रहे हैं। पिछले दिनों जब हम क्षेत्र के एक गाँव से गुजर रहे थे, तो दूर से एक चमचमाती पानी की टंकी दिखाई दी। हमें लगा— वाह! क्या बात है, विकास तो सीधे आसमान छू रहा है। 

उत्सुकता में हम टंकी के पास पहुंचे। वहां गाँव के एक बुजुर्ग हाथ में खाली बाल्टी लिए बड़े ध्यान से उस सूखी टंकी को निहार रहे थे। हमने पूछा, "बाबा, क्या देख रहे हो ? पानी आने वाला है क्या ?  ने मुस्कुराकर बहुत ही 'तीखा' जवाब दिया— "नहीं बेटा, मैं तो यह देख रहा हूँ कि इस टंकी को बनाने में जो करोड़ों रुपए बहे हैं, वो पानी की तरह बहे हैं या नेताओं की जेब में सीधे बह गए हैं! पानी का तो पता नहीं, पर इस सूखी टंकी की छांव में बैठकर हवा ज़रूर अच्छी मिल जाती है।

वाह साहब वाह ! इसे कहते हैं 'जल जीवन मिशन' का असली चमत्कार । कागज़ों पर पानी की नदियां बह रही हैं, साहब लोगों के दौरों में नारियल फूट रहे हैं, और ग्राउंड पर हालत यह है कि जनता नाले की रेत हटाकर पानी छानने को मजबूर है। हमारे क्षेत्र के 'घोषणावीर' नेता जी जब मंच पर आते हैं, तो ऐसा लगता है कि बटन दबाते ही हर घर से दूध की नदियां बहने लगेंगी। लेकिन चुनाव खत्म होते ही नेता जी ऐसे 'अंडरग्राउंड' होते हैं जैसे बिना रिचार्ज  मोबाइल का के नेटवर्क!

हंसने-हंसाने की बातें अलग हैं साहब, लेकिन मुद्दा बेहद गंभीर है। पानी कोई चुनावी वादा नहीं, बल्कि एक आम इंसान का बुनियादी हक है। जब करोड़ों का बजट पास होने के बाद भी एक माँ को चिल चिलाती धूप में पानी के लिए तड़पना पड़े, तो समझ जाइए कि सिस्टम को 'सफाई' की नहीं, बल्कि 'इलाज' की ज़रूरत है।


तीखी नज़र' का संडे संदेश:

जनता जनार्दन से भी एक छोटा सा निवेदन है अगली बार जब कोई नेता जी हाथ जोड़कर वोट मांगने आएं, तो उन्हें चाय पिलाने से पहले उसी सूखी टंकी के नीचे ले जाकर खड़े कर दीजिएगा। आखिर नेताओं की याददाश्त ठीक करने के लिए जनता का यह 'तीखा' इलाज बहुत ज़रूरी है।


​📢 'तीखी नज़र' की विशेष अपील: अब आप बनेंगे सच की आवाज़! 🫵🔥

​भैया, बंद कमरों में बैठे साहब लोगों का खेल तो हम बेनकाब करते ही रहेंगे, लेकिन असली 'तीखी नज़र' तो आपकी है! अगले हफ़्ते हम आपके इलाके के उन मुद्दों की धज्जियां उड़ाने वाले हैं जिन्हें अफसर दबाकर बैठे हैं।

तो फिर देर किस बात की? आपके वार्ड, आपके गाँव या आपके शहर में ऐसा कौन सा मुद्दा है जिस पर 'साहब' लोग कुंडली मारकर बैठे हैं? चाहे वो पानी की किल्लत हो, सड़क का घोटाला हो, या सरकारी दफ़्तरों में बाबू लोगों की मनमानी... 

कमेंट बॉक्स में लिखिए या सीधे हमारे नंबर पर व्हाट्सएप करके पूरी इनसाइड स्टोरी भेजिए! 

आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। उठाइए अपनी आवाज़, खबर हम तक पहुँचाइए, और मिलकर इस भ्रष्ट सिस्टम को 'हैंग' करते हैं!


सुरेन्द्र यादव (तीखी नज़र न्यूज़)

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