महासमुंद।
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने पुलिस महकमे की नींद उड़ा दी है। "मित्र पुलिस" का दम भरने वाली खाकी एक बार फिर सोशल मीडिया की सुर्खियों में है। मामला जिला महासमुंद के थाना सांकरा से जुड़ा है, जहाँ पदस्थ एक आरक्षक का वर्दी में नोट गिनते हुए कथित वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया के गलियारों में तेजी से तैर रही हैं।
💸 नियम में जो 'मुफ्त', उसके लिए ₹2500 का 'सौदा'?
मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला चालान (Charge Sheet) की कॉपी उपलब्ध कराने से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि कानून के मुताबिक उसे 103 पन्नों की चालान कॉपी का एक सेट नियमानुसार बिल्कुल निःशुल्क दिया जाना था। लेकिन आरोप है कि आरक्षक महाशय ने इसे 'फोटोकॉपी शुल्क' का नाम देकर पीड़ित से ₹2500 की मोटी रकम ऐंठ ली।
बात यहीं खत्म नहीं होती! शिकायतकर्ता ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब उसने पैसे देने में आनाकानी की, तो उसे डराया गया। कथित तौर पर धमकी दी गई कि"
पैसे नहीं दोगे, तो चालान पेश नहीं करेंगे और कोर्ट-थाने के ऐसे चक्कर लगवाएंगे कि परेशान हो जाओगे।"
पिथौरा थाने में भी 'मामला रफा-दफा' करने का दबाव?
पीड़ित जब इस कथित अवैध वसूली की शिकायत लेकर थाना पिथौरा पहुँचा, तो वहाँ की कहानी और भी चौंकाने वाली रही। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पिथौरा थाने में शिकायत दर्ज कराने के दौरान भी उस पर कथित रूप से मामले को दबाने और शिकायत वापस लेने के लिए भारी दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं। अब सवाल यह उठता है कि क्या महकमे के लोग अपने साथी को बचाने के लिए पीड़ित को ही मोहरा बना रहे थे?
'तीखी नजर' के कड़क सवाल: जिसका जवाब जनता चाहती है!
क्या वायरल सच पर होगी सख्त कार्रवाई?
अक्सर ऐसे मामलों में 'जांच का आश्वासन' देकर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं। क्या महासमुंद पुलिस के उच्च अधिकारी इस बार मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई करेंगे?
सच्चाई या लीपापोती?
चूंकि आरोप सीधे पुलिस के जवान पर हैं, तो क्या सांकरा या पिथौरा पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच कर पाएगी, या फिर 'डिपार्टमेंटल लॉयल्टी' के चलते सच को दबा दिया जाएगा?
आम आदमी की सुरक्षा कहाँ?
जो जनता न्याय की उम्मीद में थाने की चौखट पर जाती है, अगर उसे ही पैसों के लिए प्रताड़ित किया जाए, तो वह अपनी गुहार लेकर कहाँ जाएगी?
⚠️ तीखी नजर. का पक्ष
यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित वीडियो, स्क्रीनशॉट और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। हमारी वेबसाइट इस वायरल वीडियो और आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करती है। इस पूरे मामले में संबंधित पुलिस अधिकारियों और विभाग का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है। कानूनन जब तक दोष सिद्ध नहीं होता, तब तक इसे केवल 'कथित घटना' के रूप में देखा जाना चाहिए

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