महासमुंद/थाना कोमाखान /टुहूलू: चौकी
महासमुंद में चोरियाँ अब सिर्फ घरों के तालों तक सीमित नहीं रहीं। अब तो 50 साल पुराना बेशकीमती सागौन का पेड़ भी रातों-रात 'गायब' कर दिया गया। और जो कहानी सामने आई है, उसे पढ़कर आप भी कहेंगे भाई साहब, ऐसी शातिर प्लानिंग तो बॉलीवुड फिल्मों में भी नहीं होती!
'न रहेगा पेड़, न मिलेगा सबूत' का नायाब खेल
आरोप है कि सरपंच संघ के ब्लॉक अध्यक्ष एवन साहू और उनके साथियों ने सागौन के उस पुराने पेड़ को न सिर्फ अपना निशाना बनाया, बल्कि उसे काटने के बाद जो किया, वो हैरान करने वाला है। लकड़ी को बाहर ले जाकर बेचने के बजाय, आरोपियों ने पास की एक बाड़ी में गहरा गड्ढा खोदा और सागौन के लट्ठों को जमीन में 'दफन' कर दिया। मास्टरमाइंड की सोच यही थी—'जमीन के अंदर सब कुछ सुरक्षित रहेगा, किसी को भनक तक नहीं लगेगी।'
पुलिस की 'खुदाई' ने खोल दी पोल
पुलिस और वन विभाग की टीम ने जब मौके पर जाकर खुदाई शुरू की, तो जमीन के अंदर से निकली सागौन की लकड़ी का जखीरा देखकर अधिकारियों की आँखें फटी की फटी रह गईं। 50 साल की उम्र और 2.60 मीटर की मोटाई वाला वह पेड़, जो कल तक शान से खड़ा था, अब टुकड़ों में पुलिस के कब्जे में था। लालच में डूबे इन लोगों ने यह नहीं सोचा कि प्रकृति का यह 50 साल का अनमोल निवेश चंद टुकड़ों के लिए दफन कर दिया गया।
अब कानून की खुदाई का इंतज़ार!
प्रार्थी राधेश्याम चंद्राकर ने सरपंच एवन साहू पर दबंगई का आरोप लगाते हुए जो शिकायत दर्ज कराई, उसने इन 'साहब' के सारे दांव उलटे कर दिए हैं। अब पुलिस की धाराओं का शिकंजा कस चुका है और एवन साहू व उनके साथियों की तलाश जारी है।
'तीखी नज़र' की टिप्पणी:
पेड़ को काटकर जमीन में गाड़ देना यह बताता है कि साहब को कानून का कितना कम खौफ था। लेकिन याद रखिए, जंगल का कानून हो या देश का, अपराधी लाख कोशिश करे, खुदाई में सच बाहर आ ही जाता है। अभी तो सिर्फ लकड़ी बाहर आई है, अब देखना ये है कि कानून की इस 'खुदाई' में और कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होते हैं!


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