महासमुंद
प्रदेश में एक ओर किसान डीएपी और यूरिया की किल्लत से जूझ रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर मुनाफाखोरों ने इसे अपनी 'कमाई का जरिया' बना लिया है। कृषि विभाग द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायपुर और महासमुंद जिलों में चल रही खाद की कालाबाज़ारी पर विभाग ने शिकंजा कसा है।
रायपुर: समोदा में अवैध गोदामों का भंडाफोड़
आरंग विकासखंड के ग्राम समोदा में नेतराम वर्मा (राशि वर्मा) द्वारा संचालित कृषि सेवा केंद्र पर विभाग ने छापेमारी की। जांच में सामने आया कि संचालक के पास केवल एक दुकान और एक गोदाम का लाइसेंस था, लेकिन वह अवैध रूप से दो अतिरिक्त गोदाम किराए पर लेकर खाद जमा कर रहा था। टीम ने यहाँ से डीएपी, एनपीके और सुपर फास्फेट सहित कुल 60.15 टन खाद जब्त की है।
जब्त खाद का विवरण (टन में):
- किसान सुपर (पावडर): 16.4
- किसान सुपर (दानेदार): 7.90
- एनपीके (5.15.0.10): 11.10
- एनपीके (20.5.0.023): 0.45
- मल्टीपास: 0.60
- डीएपी (इंडियन पोटाश): 2.45
- डीएपी (इफको): 0.90
- एसएसपी पावडर: 0.45
- पावडर (16.30.10): 20.0
महासमुंद में भी कार्रवाई: उड़ीसा प्रिंट वाली खाद बरामद
रायपुर के बाद महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के ग्राम घोयनाबाहरा स्थित 'वैष्णवी एग्रो इंडस्ट्रीज' में भी कृषि विभाग ने दबिश दी। यहाँ से उड़ीसा (जिला बरगढ़) प्रिंट वाली पीआरओएम उर्वरक की 11 बोरियां (लगभग 550 किलोग्राम) जब्त की गई हैं।
तीखी नज़र
प्रशासन की यह कार्रवाई साफ़ संकेत देती है कि किसानों की मजबूरी का फायदा उठाने वाले कालाबाज़ारी अब विभाग की रडार पर हैं। खाद के अवैध भंडारण और अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर विभाग की 'तीखी नज़र' बनी रहेगी।


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