महासमुंद/बागबाहरा:
अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब किसी गरीब की जान लेना इनके लिए मामूली बात हो गई है। लेकिन जब समाज जागता है, तो इंसाफ की आवाज़ बुलंद होती है। ग्राम मंदिर हसौद में रहकर मेहनत-मजदूरी करने वाले, बागबाहरा के चकचकी (कोमाखान )निवासी भुनेश्वर यादव की निर्मम हत्या के खिलाफ अब महासमुंद का यादव समाज आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गया है।
'तीखी नज़र न्यूज़' को मिली जानकारी के अनुसार, आज यादव समाज ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम महासमुंद जिलाधीश (कलेक्टर) श्री विनय कुमार लंगेह को ज्ञापन सौंपा है। समाज की मांग बिल्कुल साफ़ और दोटूक है"हत्यारों को सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा हो /कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो !"
अपराधियों में कानून का खौफ जरूरी, पीड़ित परिवार को मिले न्याय
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा के पदाधिकारियों ने जिला अध्यक्ष विनोद यादव एवं वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष राम आसरे यादव के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मांगें रखीं। समाज के नेताओं का कहना है कि भुनेश्वर यादव की हत्या इतनी बेरहमी से की गई कि सुनने वालों की रूह कांप जाए। ऐसे दरिंदों को समाज में रहने का कोई हक नहीं। है। जब तक इन हत्यारों को फांसी या कड़ी कड़ी सजा मिले जिससे
अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के मन में कानून का डर पैदा हो।
1 करोड़ की सहायता राशि दे सरकार'—आर्थिक संकट में परिवार
भुनेश्वर यादव अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। वे अत्यंत गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, और उनकी मौत के बाद उनके पीछे छूटे बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों के सामने जीवन यापन का गहरा संकट और आर्थिक तंगी पैदा हो गई है।
यादव समाज ने पीड़ित परिवार के आंसुओं को पोंछने के लिए छत्तीसगढ़ शासन से तत्काल 1 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की पुरज़ोर मांग की है।
कलेक्ट्रेट में जुटे समाज के दिग्गजों ने , दिखाई एकजुटता
आज ज्ञापन सौंपने के दौरान यादव समाज ने अपनी एकजुटता की ताकत दिखाई। इस दौरान वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष राम आसरे यादव, जिला अध्यक्ष विनोद यादव, आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक प्रत्याशी भैया संजय यादव, मंगधा यादव समाज के जिला अध्यक्ष श्री शरद कुमार हंस, सुंदर यादव, मिलाप यादव, सतीश यादव, संजय यादव, सुरेश यादव, मनोहर यादव एवं राजकुमार यादव मुख्य रूप से शामिल रहे। इन सभी नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अगर पीड़ित परिवार को जल्द न्याय और मुआवजा नहीं मिला, तो समाज चुप नहीं बैठेगा और आंदोलन को उग्र किया जाएगा।
'तीखी नज़र' की बेबाक राय:
किसी गरीब की हत्या सिर्फ एक परिवार की हत्या नहीं, बल्कि पूरे कानून व्यवस्था पर तमाचा है। सरकार और प्रशासन को इस मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराकर हत्यारों को फांसी की सजा दिलानी ही होगी, ताकि फिर कोई भुनेश्वर किसी दरिंदगी का शिकार न बने।

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