महासमुंद ब्रेकिंग: अधिकारियों की सुस्ती पर लगेगा 'डिजिटल ताला', शुरू हो रही सीएम हेल्पलाइन 1076
सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस चुके आम नागरिकों के लिए एक राहत भरी और अधिकारियों की नींद उड़ाने वाली खबर है। जनता की शिकायतों को अब 'फाइल' में दबाकर भूल जाना अफसरों के लिए मुमकिन नहीं होगा। सीधे मुख्यमंत्री निवास (सीएम हाउस) से जुड़ने वाली महत्वाकांक्षी 'सीएम हेल्पलाइन 1076' की महासमुंद में धमाकेदार एंट्री होने जा रही है।
इस हाईटेक व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए महासमुंद के संयुक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में जिला स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर्स द्वारा कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। विनय कुमार लंगेह ने सभी अधिकारियों को दो टूक लहजे में साफ कर दिया है कि इस हेल्पलाइन की शिकायतों पर टालमटोल बर्दाश्त नहीं होगी, समय-सीमा के भीतर ही निराकरण करना होगा।
क्यों खास है यह नई व्यवस्था?
पूरे सिस्टम का खाका बेहद मजबूत तैयार किया गया है, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
24 घंटे ऑन-ड्यूटी: यह हेल्पलाइन सेंटर सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे काम करेगा। यानी आधी रात को भी आपकी समस्या दर्ज होगी।
शिकायत के कई रास्ते: जनता सिर्फ फोन (टोल फ्री नंबर 1076 और 18002333300) ही नहीं, बल्कि आधुनिक माध्यमों जैसे वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के जरिए भी अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकती है।
यूनिक आईडी से खुलेगी पोल: शिकायत दर्ज होते ही आवेदक को एक यूनिक आईडी (विशिष्ट पहचान संख्या) मिलेगी। इसके जरिए नागरिक घर बैठे ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे कि उनकी फाइल किस साहब की टेबल पर धूल खा रही है और उस पर क्या कार्रवाई हुई है।
जब तक जनता 'हां' नहीं कहेगी, फाइल बंद नहीं होगी!
इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी और तीखी खासियत यह है कि अब अधिकारी अपनी मर्जी से 'फर्जी' निराकरण दिखाकर फाइल बंद नहीं कर पाएंगे।
पक्का फीडबैक सिस्टम:
शिकायत का समाधान होने के बाद सीधे आवेदक को फोन किया जाएगा। अगर जनता कहेगी कि हां, वह समाधान से संतुष्ट है, तभी शिकायत को बंद (क्लोज) माना जाएगा।
लापरवाही की तो खुद बढ़ेगा एक्शन:
यदि आवेदक ने कह दिया कि वह संतुष्ट नहीं है, तो शिकायत बंद होने के बजाय स्वतः ही (Automatically) अगले ऊंचे स्तर के अधिकारी के पास एक्टिव हो जाएगी। यानी अफसरों की जवाबदेही अब सीधे जनता के हाथ में होगी।
प्रशिक्षण दल के प्रमुख आरके शर्मा और आईटी मैनेजर सौरभ श्रीकांत ने पीपीटी (PPT) के माध्यम से जिले के सभी विभागों को इस डिजिटल चाबुक को चलाने की पूरी प्रक्रिया बारीकी से समझाई है।
'तीखी नजर' की टिप्पणी:
कागजी घोड़े दौड़ाने वाले अफसरों के लिए यह हेल्पलाइन किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगी। अब देखना यह है कि इस कड़े सिस्टम के बाद महासमुंद के सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली में कितना सुधार आता है!

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