महासमुंद
तोशगांव: शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में जब शिक्षक ही 'मर्यादा' भूल जाएं, तो भविष्य का क्या होगा? ऐसा ही एक शर्मनाक मामला राष्ट्रीय राजमार्ग-53 स्थित ग्राम पौसरा के शासकीय उच्च प्राथमिक शाला से सामने आया है। यहाँ के कथित शराबी शिक्षकों की मनमानी से तंग आकर बच्चों और अभिभावकों ने बड़ा कदम उठाया है।
क्या है पूरा मामला?
कभी 35-40 बच्चों की किलकारियों से गुलजार रहने वाला यह स्कूल आज बदहाली की कगार पर है। शिक्षकों की पढ़ाई के प्रति उदासीनता और पालकों के साथ दुर्व्यवहार के चलते पिछले वर्ष यहाँ पढ़ रहे सभी 14 विद्यार्थियों ने अपना टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) निकलवा लिया। इतना ही नहीं, नए सत्र में प्राथमिक शाला से 6वीं में प्रमोट हुए बच्चों को भी उनके माता-पिता ने स्कूल भेजने से साफ इनकार कर दिया है।
पालकों ने भरी हुंकार: शिक्षक बदलें, तभी बच्चे पढ़ेंगे
हाल ही में विद्यालय परिसर में ग्रामीणों और पालकों की एक बड़ी बैठक हुई, जिसमें बीआरसी अनिल सिंह साव और संकुल समन्वयक मनबोध नंद के सामने 70 से अधिक ग्रामीणों ने अपना आक्रोश जाहिर किया।
पालकों ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक प्रधान पाठक बिहारी लाल साहू, शिक्षक प्रीतम पटेल और शिक्षिका अनुसुईया पुरोहित का तबादला नहीं किया जाता, तब तक वे बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे और उनका आंदोलन जारी रहेगा।
प्रधान पाठक का पुराना 'दागदार' इतिहास:
ग्रामीणों ने खुलासा किया कि प्रधान पाठक बिहारी लाल साहू का रिकॉर्ड पहले भी खराब रहा है। बसना ब्लॉक के गौरटेक स्कूल में पदस्थ रहने के दौरान भी शराब पीकर स्कूल आने की शिकायत पर उन्हें निलंबित किया गया था। हैरानी की बात है कि बहाली के बाद पौसरा आने पर भी उनकी आदतों में कोई सुधार नहीं आया।
तीखी नजर की बात:
क्या शिक्षा विभाग ऐसे 'जिम्मेदार' शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई करेगा या फिर बच्चों का भविष्य यूं ही दांव पर लगा रहेगा?

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