महासमुंद:
छत्तीसगढ़ कैडर के युवा और अपने नवाचारों के लिए पहचाने जाने वाले IAS अधिकारी एवं महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के नेतृत्व में जिले में चलाए गए जल संरक्षण अभियान ने राष्ट्रीय स्तर पर एक मिसाल कायम की है। उनके कार्यकाल में शुरू किए गए 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान के तहत महासमुंद जिले में बारिश के पानी को सहेजने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है।
15 दिनों में तैयार हुई 3.41 लाख से अधिक संरचनाएं
प्रशासन और जनभागीदारी के अनूठे समन्वय से जिले के 551 ग्राम पंचायतों के 1140 से अधिक गांवों में जल संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कार्य हुआ।
रिकॉर्ड समय: महज 15 दिनों के भीतर जिले में 17 प्रकार की कुल 3 लाख 41 हजार जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गईं।
प्रमुख संरचनाएं: इनमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग सोख्ता गड्ढे, सोकपिट, ब्रश वुड संरचनाएं, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, स्टैंगर्ड कंटूर ट्रेंच, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच और नालों पर बनाए गए बोरी बंधन शामिल हैं।
मनरेगा और अन्य विभागों के सहयोग से तालाब, गेबियन, डबरी और कूप जैसी संरचनाओं का भी निर्माण किया गया ताकि बारिश का पानी व्यर्थ बहकर नदियों में न जाए, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही संचित हो सके।
इस अभियान की सफलता का पूरा श्रेय जनभागीदारी को जाता है। कृषि विभाग, जिला पंचायत, वन विभाग और जनपद पंचायत सहित कई विभागों ने मिलकर इसे जमीन पर उतारा। आम नागरिकों ने भी अपने स्तर पर सोख्ता गड्ढे और जल संरक्षण संरचनाएं तैयार करने में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस बेहतरीन उपलब्धि के लिए भारत सरकार द्वारा जिला प्रशासन को एक करोड़ रुपये की नकद पुरस्कार राशि से सम्मानित भी किया गया है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर से IAS तक का सफर
मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के बाहू फोर्ट क्षेत्र के रहने वाले विनय कुमार लंगेह का जन्म 13 दिसंबर 1988 को हुआ था। सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़कर उन्होंने UPSC की राह चुनी और साल 2013 में 477वीं रैंक हासिल कर IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। छत्तीसगढ़ कैडर मिलने के बाद उन्होंने बिलासपुर, सरायपाली (एसडीएम), गरियाबंद, अंबिकापुर (CEO) और कोरिया जिले में कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं देते हुए कई नवाचार किए हैं। कोरिया में 'झुमका जल महोत्सव' और 'कोरिया मिलेट्स कैफे' जैसी उनकी पहले भी काफी लोकप्रिय रही हैं।

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