बागबाहरा दुष्कर्म मामले में नरेंद्र नयन शास्त्री को हाईकोर्ट से जमानत, FIR में करीब 3 साल की देरी बनी अहम आधार

 






बिलासपुर/महासमुंद। बागबाहरा 


बागबाहरा थाना क्षेत्र में दर्ज दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी नरेंद्र नयन शास्त्री को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने 7 अगस्त 2026 को मामले में आदेश पारित करते हुए एफआईआर दर्ज होने में हुई करीब तीन साल की देरी, चार्जशीट दाखिल होने और आरोपी के न्यायिक अभिरक्षा में रहने सहित अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखा।

हालांकि दुष्कर्म मामले में जमानत मिलने के बावजूद नरेंद्र नयन शास्त्री की तत्काल जेल से रिहाई नहीं होगी। उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के एक अन्य मामले में जमानत नहीं मिलने के कारण उन्हें फिलहाल न्यायिक अभिरक्षा में ही रहना होगा।

मई 2023 की कथित घटना, जून 2026 में दर्ज हुई FIR

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार यह मामला बागबाहरा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 107/2026 से संबंधित है। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(i), 376(2)(n) और 376(2)(m) के तहत अपराध दर्ज किया गया था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता आंखों की समस्या से परेशान थी और उपचार के लिए आरोपी के संपर्क में आई थी। आरोप है कि नरेंद्र नयन शास्त्री ने धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से उपचार का भरोसा दिलाया।

मई 2023 में पीड़िता अपने परिजनों के साथ बागबाहरा स्थित श्री जिन कुशल सूरी जैन भवन पहुंची थी, जहां आरोपी भागवत कथा कर रहा था। अभियोजन के मुताबिक, उपचार के बहाने पीड़िता को कमरे में बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। अगले दिन भी इसी तरह की घटना होने का आरोप शिकायत में लगाया गया।

विवाह के बाद सामने आई शिकायत

अदालती आदेश के मुताबिक पीड़िता का विवाह 2 मार्च 2025 को हुआ था। विवाह के बाद उसने अपने पति को कथित घटना की जानकारी दी। इसके बाद शिकायत की गई और 6 जून 2026 को बागबाहरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

जमानत पर सुनवाई में देरी का मुद्दा प्रमुख रहा

जमानत आवेदन पर बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष तर्क रखा कि कथित घटना मई 2023 की है, जबकि एफआईआर करीब तीन वर्ष बाद दर्ज हुई। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि पुलिस द्वारा मामले में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और आरोपी 14 जून 2026 से न्यायिक अभिरक्षा में है।

राज्य की ओर से जमानत का विरोध किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी को नियमित जमानत देने का आदेश पारित किया।

जमानत के साथ अदालत ने रखीं शर्तें

हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए आरोपी को निर्देश दिया है कि वह मुकदमे के दौरान किसी गवाह को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेगा। इसके अलावा अनावश्यक स्थगन की मांग नहीं करने और ट्रायल कोर्ट द्वारा तय सभी तारीखों पर उपस्थित रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट को भी निर्देशित किया है कि यदि कोई कानूनी बाधा न हो तो मामले की सुनवाई छह माह के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए।

दूसरे मामले में जमानत नहीं

दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बावजूद नरेंद्र नयन शास्त्री को फिलहाल जेल से बाहर आने का रास्ता नहीं मिला है। धारा 420 से जुड़े एक अन्य प्रकरण में जमानत नहीं मिलने के कारण वह अभी न्यायिक अभिरक्षा में ही रहेंगे।

तीखी नजर न्यूज़ —

 न्यायालय के आदेश और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर यह खबर प्रकाशित की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय द्वारा किया जाना है।

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