संघर्ष और लगन की मिसाल: सीआरपीएफ ट्रेनी प्रितम सिंह ठाकुर का गृहग्राम भलेसर में हुआ भव्य स्वागत

 



भलेसर (कोमाखान):


देश सेवा का जज्बा और सीने में कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो, तो हर बाधा पार की जा सकती है। इसी बात को सच साबित कर दिखाया है भलेसर गांव के युवा प्रितम सिंह ठाकुर ने, जो केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में चयन के बाद अपना प्रशिक्षण प्राप्त कर पहली बार गृहग्राम पहुंचे। गांव के इस बेटे के स्वागत में पूरा इलाका गर्व और उत्साह से सराबोर नजर आया।

​प्रितम सिंह ठाकुर स्वर्गीय जोधन सिंह ठाकुर और माता भुखई बाई ठाकुर के सुपुत्र हैं। उनका यह सफर आसान नहीं रहा। उनके पिता ने कृषि मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण किया और बेहद सीमित संसाधनों के बावजूद बेटे की शिक्षा में कोई आंच नहीं आने दी। पारिवारिक संघर्षों के बीच पले-बढ़े प्रितम ने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के बल पर देश के इस प्रतिष्ठित सुरक्षा बल में अपनी जगह बनाई है।

​वर्तमान में प्रितम सिंह ठाकुर का छह महीने का कड़ा प्रशिक्षण तमिलनाडु में प्राप्त करके । पहली बार सीआरपीएफ की  शान वाली वर्दी पहनकर अपने गांव भलेसर पहुंचे, तो परिजनों, मित्रों और ग्रामीणों ने डीजे और बाजेगाजे के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और पुष्पवर्षा के बीच युवाओं और बुजुर्गों ने उन्हें कंधे पर बैठाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

​इस मौके पर ग्रामीणों ने भावुक होते हुए कहा, “जिस माटी में यह बेटा पले-बढ़ा, आज उसी माटी पर देश की वर्दी पहनकर इसका लौटना हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है। यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे अंचल की सफलता है।

​साधारण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखने वाले प्रितम की यह सफलता अब भलेसर सहित आसपास के युवाओं के लिए भी एक बड़ा प्रेरणास्रोत बन गई है। ग्रामीणों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की कामना करते हुए विश्वास जताया है कि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद यह युवा देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देकर क्षेत्र का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेगा।



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