महासमुंद LPG महा-घोटाला: आपदा को बनाया 'अवसर', 90 लाख की रिश्वत में बिका 87 टन गैस; महाराष्ट्र में दबोचे गए 'मास्टरमाइंड' बाप-बेटे!


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पर्दाफाश: 11 शहरों के टावर डंप, सीडीआर और टोल डेटा खंगालने के बाद कोल्हापुर के होटल से गिरफ्तार हुए संतोष और सार्थक ठाकुर!


​बड़ा खुलासा: पर्दे के पीछे का असली खेल, खाद्य अधिकारी अजय यादव था मुख्य षड्यंत्रकारी; पंकज बना डील मेकर!

​आंकड़ों का खेल: अप्रैल में खरीदी दिखाई सिर्फ 40 टन, और कच्चे बिल पर बिना GST के बेच डाली 135 टन सरकारी गैस


इसे कहते हैं आपदा में 'महा-अवसर' तलाशना! जिस गैस को भीषण गर्मी में ब्लास्ट के डर से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी मिली थी, उसी गैस को सिस्टम के रक्षकों ने मिलकर बाजार में ब्लैक कर दिया। महासमुंद पुलिस ने तकनीकी जाल बुनकर इस खेल के सबसे बड़े मोहरों—ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और उसके डायरेक्टर बेटे सार्थक ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से दबोच लिया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय सभागार में खड़े इन आरोपियों की हेकड़ी अब पूरी तरह निकल चुकी है।


​आइए, "तीखी नजर" के साथ इस पूरे सिंडिकेट के उस 'कच्चे चिट्ठे' का विश्लेषण करते हैं, जिसे पढ़कर आपका माथा ठनक जाएगा।


​साजिश का 'टाइम-लाइन' और 90 लाख का सौदा


​यह कोई अचानक हुई चोरी नहीं थी, बल्कि बंद कमरों में लिखी गई एक सोची-समझी स्क्रिप्ट थी।

​19 मार्च 2026: ट्रकों की सुपुर्दगी मिलने के पूरे 11 दिन पहले ही गबन की स्क्रिप्ट तैयार हो चुकी थी। योजना थी कि गैस सिलेंडरों (कैप्सूल) का वजन न कराया जाए और इन्हें जल्द से जल्द खाली कर दिया जाए।

​30 मार्च 2026: सिंघोड़ा थाने में जप्त 6 नग गैस कैप्सूल ट्रकों (कुल 87 टन गैस, कीमत लगभग ₹77,00,000) को सुरक्षा के नाम पर ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स (उरला, रायपुर) को सुपुर्द कर दिया गया।

​घूस का खेल: इस सरकारी संपत्ति को डकारने के लिए सबसे पहले ₹1,30,00,000 (एक करोड़ तीस लाख) की मांग की गई थी। एक हफ्ते तक चले कड़े मोल-भाव के बाद सौदा ₹90,00,000 (नब्बे लाख) में तय हुआ।



​विभाग का 'साहब' ही निकला मुख्य विलेन!


​पुलिस की कड़क जांच में जो चेहरे सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इस गबन के पीछे कोई मामूली चोर नहीं, बल्कि खुद सरकारी नुमाइंदे थे:


​अजय यादव (जिला खाद्य अधिकारी): यह इस पूरे काले साम्राज्य का 'मास्टरमाइंड' और परदे के पीछे का मुख्य षड्यंत्रकारी था।

​पंकज चंद्राकर: यह इस डील का 'फेस' यानी डील मेकर बना हुआ था।

​मनीष चौधरी: इसने मुख्य मध्यस्थता की और रिश्वत की रकम तय कराने के लिए विभिन्न कड़ियों को जोड़ा।

​कूटरचित पंचनामा: हद तो तब हो गई जब गैस खाली होने के बाद (6 से 8 अप्रैल के बीच) खाद्य विभाग के दफ्तर में बैठकर फर्जी तौल पंचनामा बनाया गया और मजे की बात देखिए, मुख्य षड्यंत्रकारियों को ही इसका गवाह बनाकर उनके दस्तखत करा लिए गए।



​कच्चा बिल, नो GST: ऐसे खपाया 135 टन गैस


​जब सुपुर्दगी में सिर्फ 87 टन गैस मिली थी, तो बड़ा सवाल है कि खेल कितना बड़ा था?


​तीखी नजर का गणित: 


आरोपियों ने चालाकी दिखाते हुए अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के खातों में सिर्फ 40 टन एलपीजी की वैध खरीदी दिखाई, लेकिन इसके एवज में बाजार के 20 विभिन्न कमर्शियल संस्थानों और एजेंसियों को बिना GST के कच्चे बिल पर मनमाने रेट में 135 टन एलपीजी बेच डाली! यानी सीधे-सीधे राजस्व को चूना और करोड़ों की ब्लैक मनी का खेल।



​11 शहरों का नेटवर्क तोड़कर ऐसे दबोचे गए आरोपी


​मामला दर्ज होने के बाद संतोष ठाकुर और उसका बेटा सार्थक लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे। वे लगातार मोबाइल और सिम कार्ड बदल-बदलकर पुलिस को चकमा दे रहे थे।

लेकिन पुलिस की चार स्पेशल टीमों ने कड़क घेराबंदी की। रायपुर, कवर्धा, छूईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई होते हुए सुराग कोल्हापुर (महाराष्ट्र) तक पहुंचा। पुलिस ने 11 शहरों के टावर डंप, टोल डेटा, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया। अंततः कोल्हापुर के 'न्यू चालुक्य होटल' में छिपकर बैठे बाप-बेटे को दबोच लिया गया। संतोष ठाकुर के पास से ₹20,000 नगद जप्त कर कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाया गया है।


​तीखा तेवर: अभी कई 'सफेदपोश' रडार पर हैं!


​इस मामले में खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव पहले ही सलाखों के पीछे जा चुके हैं। अब कंपनी के मालिक और डायरेक्टर भी अंदर हैं। लेकिन तफ्तीश यहीं खत्म नहीं होती।


​तीखी नजर का तीखा सवाल 


बिना टैक्स और बिना कागजात के जिन 20 संस्थानों ने इस चोरी की गैस को खरीदा, क्या उन पर बुलडोजर चलेगा? क्या टैक्स चोरी और अवैध रिफिलिंग कराने वाले उन खरीदारों को पुलिस सह-आरोपी बनाएगी? खेल बहुत लंबा है बॉस, और कड़ियां अभी और जुड़नी बाकी हैं!


तीखी नजर न्यूज़ /महासमुंद।



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