मीडिया रिपोर्ट्स का बड़ा खुलासा: महासमुंद PWD निर्माण में धांधली की इंतहा, पुलिया में कंक्रीट की जगह खाली बोरियां ठूंसने का दावा!

 




महासमुंद /कोमाखान /नर्रा 


महासमुंद के बागबाहरा ब्लॉक से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आ रहा है, जिसने लोक निर्माण विभाग (PWD) के दावों और ठेकेदारी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, परसुली से बनियातोरा तक बन रही करीब 3 किलोमीटर लंबी सड़क और पुलिया निर्माण में नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम धांधली की जा रही है।

​इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।


दावा: 'खोखली' पुलिया को छुपाने के लिए ठूंस दी गईं सीमेंट की बोरियां!


​मीडिया रिपोर्ट्स में सबसे सनसनीखेज दावा पुलिया के निर्माण को लेकर किया गया है। खबरों के अनुसार, कंक्रीट डालते समय अनिवार्य तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया और वाइब्रेटर मशीन का उपयोग तक नहीं हुआ, जिससे पुलिया के भीतर बड़ा खोखलापन रह गया। इस गंभीर तकनीकी खामी और अपनी चोरी को छुपाने के लिए ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा कंक्रीट की जगह सीमेंट की खाली बोरियां ठूंसने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ये बोरियां अब बाहर से साफ नजर आ रही हैं, जो पहली ही बारिश में पूरी संरचना के ढहने का संकेत दे रही हैं।


मुनाफाखोरी का आरोप: सड़क किनारे खोद दिए 4 फीट गहरे गड्ढे


​रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठेकेदार ने अपनी लागत बचाने के लिए एक और खतरनाक रास्ता अपनाया। सड़क निर्माण के लिए मुरुम बाहर से लाने के बजाय, मुनाफे के चक्कर में सड़क के दोनों किनारों से ही 3 से 4 फीट गहरी खुदाई कर मुरुम निकाल लिया गया। इसके चलते मार्ग के दोनों ओर जानलेवा गड्ढे बन गए हैं। ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि ये गड्ढे रात के समय किसी भी बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं और वाहन चालकों के लिए काल साबित हो सकते हैं।


पारदर्शिता गायब: 4 महीने से नहीं लगा कोई 'सूचना बोर्ड'


​सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी सार्वजनिक निर्माण स्थल पर कार्य की लागत, स्वीकृत राशि और ठेकेदार की जानकारी वाला सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले 4 महीनों से काम चलने के बावजूद यहाँ जानबूझकर कोई बोर्ड नहीं लगाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पारदर्शिता से बचने और अपनी अनियमितताओं को छुपाने के लिए ऐसा किया गया है।


जोखिम भरे काम में 'बाल श्रम' कराने के भी आरोप


​इस मामले का एक और बेहद संवेदनशील और कानूनी रूप से गंभीर पहलू भी मीडिया की सुर्खियों में है। आरोप है कि निर्माण स्थल पर नियमों का उल्लंघन करते हुए 14 से 17 वर्ष के नाबालिग किशोरों से बाल श्रम कराया जा रहा है। इन बच्चों से कंक्रीट का मसाला बनाने जैसे भारी और जोखिम भरे काम लिए जा रहे हैं, जिससे उनके भविष्य और सुरक्षा पर संकट मंडरा रहा है।


प्रशासनिक रुख: जांच के बाद कड़ी कार्रवाई का भरोसा


​मामले के तूल पकड़ने के बाद विभाग के उच्च अधिकारियों तक भी इसकी गूंज पहुंची है। बागबाहरा के संबंधित PWD अधिकारियों (SDO) का कहना है कि मीडिया के माध्यम से यह मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मटेरियल की तकनीकी जांच कराई जाएगी, बाल श्रम के आरोपों को परखा जाएगा और दोषी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।


'तीखी नजर' की टिप्पणी:


विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा उठाए गए ये सवाल सीधे तौर पर जनता की सुरक्षा और सरकारी धन के सदुपयोग से जुड़े हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर कितनी जल्दी और कितनी निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया जाएगा।











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