कोमाखान / तीखी नजर न्यूज़
छत्तीसगढ़ के बागबाहरा अंचल में सत्ता के रसूख का इस्तेमाल कर गरीबों की पैतृक ज़मीन हड़पने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम लोंदामुडा-पंचायत पतेरापाली के निषाद परिवार ने गांव के ही एक पूर्व सरपंच पर फर्जी पट्टा बनाकर उनकी करीब 4.5 एकड़ पैतृक 'लगानी' ज़मीन पर कब्जा करने का गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि पूर्व सरपंच ने राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर इस ज़मीन को फर्जी तरीके से अपने और अपनी पत्नी के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा लिया है। हद तो तब हो गई जब पीड़ित परिवार ने जब अपनी ज़मीन का सीमांकन कराया, तो सच्चाई सामने आई। जिस ज़मीन पर आज भी उनके पूर्वजों के स्मारक (मठ) बने हुए हैं, उस पर पूर्व सरपंच खेती कर रहे हैं।
पीड़ित परिवार परेशान, प्रशासन पर उठे सवाल!
पीड़ित किसान खेम सिंह निषाद, पवन निषाद और नारायण निषाद ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि अब पूर्व सरपंच और उनके परिजन उन्हें आए दिन धमकियां दे रहे हैं और गाली-गलौज कर रहे हैं।
तीखी नज़र' के सवाल:मिलीभगत का खेल
एक मृत व्यक्ति के मठ वाली ज़मीन को कोई जीवित व्यक्ति अपने नाम कैसे करवा सकता है? क्या हल्का पटवारी और राजस्व निरीक्षक की मिलीभगत के बिना यह संभव था?
प्रशासन की चुप्पी:
जब राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी का मामला सामने आ चुका है, तो अब तक उस अधिकारी-कर्मचारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई जिसने यह फर्जीवाड़ा दर्ज किया?
न्याय की आस:
क्या बागबाहरा प्रशासन इस रसूखदार व्यक्ति पर कार्रवाई कर पीड़ित निषाद परिवार को उनकी पैतृक ज़मीन वापस दिला पाएगा, या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
यह केवल ज़मीन हड़पने का मामला नहीं है, बल्कि गरीब निषाद परिवार के अधिकारों का घोर उल्लंघन है। यदि रसूखदार लोग अधिकारियों के साथ मिलकर पूर्वजों की ज़मीन पर कब्जा करने लगेंगे, तो गरीब आदमी का न्याय पर से भरोसा उठ जाएगा। प्रशासन को इस मामले में निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।


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