महासमुंद : शिवालिक स्टील प्लांट की बड़ी लापरवाही, इलाज के दौरान कर्मचारी की मौत; अब शव लेकर धरने पर बैठे परिजन!

 





महासमुंद | तीखी नज़र न्यूज़  



​महासमुंद जिले के बेलसोडा स्थित 'शिवालिक स्टील प्लांट' एक बार फिर विवादों के घेरे में है। कंपनी की कथित लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण एक नियमित कर्मचारी रमेश जांगड़े की जान चली गई। अब आक्रोशित परिजन शव को प्लांट के मुख्य गेट पर रखकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।


​ क्या है पूरा मामला? 


मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम नांदगांव निवासी रमेश जांगड़े शिवालिक स्टील प्लांट में नियमित कर्मचारी थे। 22 मार्च 2026 की रात ड्यूटी के दौरान एक जूनियर कर्मचारी की लापरवाही के कारण रमेश की आंखों में गंभीर चोट आई। आरोप है कि प्रबंधन ने न केवल परिजनों को अंधेरे में रखा, बल्कि बिना सूचना दिए उन्हें रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।

परिजनों का आरोप है कि घटना के कई दिनों बाद उन्हें चोट के बारे में बताया गया। इलाज में भारी लापरवाही बरती गई और मरीज को अधूरी स्थिति में ही घर भेज दिया गया। जब दर्द असहनीय हो गया, तो आनन-फानन में उन्हें 'रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल' में भर्ती कराया गया, जहाँ 22 जून 2026 को उनकी मौत हो गई।


मौत के बाद प्रबंधन का दोहरा रवैया  


कर्मचारी की मौत के बाद अब शिवालिक स्टील प्लांट प्रबंधन ने मुआवजे और जिम्मेदारी लेने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इस संवेदनहीनता से नाराज परिजन रायपुर में पोस्टमार्टम के बाद शव को प्लांट के मुख्य गेट पर रखकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ चुके हैं।


​'तीखी नज़र' के तीखे सवाल  


​प्रशासन कहाँ है? क्या किसी कर्मचारी की जान की कीमत इतनी कम है कि प्रबंधन बिना सूचना दिए इलाज कराता रहा और अंत में पल्ला झाड़ लिया?

​सुरक्षा नियमों की धज्जियाँ: स्टील प्लांट जैसे संवेदनशील जगह पर लापरवाही करने वाले उस जूनियर कर्मचारी और प्रबंधन पर अब तक कोई एफआईआर क्यों नहीं हुई?

​न्याय कब? क्या गरीब परिवार को न्याय पाने के लिए सड़क पर लाश रखकर धरना देना ही एकमात्र विकल्प बचा है?

तीखी नज़र की राय 

घटनास्थल पर भारी आक्रोश है। यदि प्रबंधन ने समय रहते संज्ञान लिया होता और मानवीय आधार पर उचित मुआवजा व कार्रवाई की होती, तो आज यह नौबत नहीं आती। प्रशासन को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई कर

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