पिथौरा / महासमुंद
परमेश्वरी धाम मंदिर में चोरों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पिथौरा में कानून का राज नहीं, चोरों का राज चल रहा है। रात के अंधेरे में घुसकर दानपेटी तोड़ी, भगवान के सोने-चांदी के आभूषण उतारे और जितनी नगदी थी, वो भी ‘चरणामृत’ समझकर ले गए।
सवाल यह है मंदिर जैसी पवित्र जगह पर सुरक्षा कहां थी?
या फिर प्रशासन और पुलिस ने इसे भी चोरों के लिए ‘ओपन इनविटेशन’ रख रखा है?
चोरों के हौसले और पुलिस की ‘नींद’
यह कोई पहली घटना नहीं है। पिथौरा थाना क्षेत्र में लगातार चोरियां हो रही हैं — दुकानें, घर, अब मंदिर। चोरों का मनोबल इतना ऊंचा है कि वे अब धार्मिक स्थलों को भी आसान निशाना बना रहे हैं।
श्रद्धालुओं का गुस्सा और सिस्टम की बेनकाबी
स्थानीय लोग अब खुलकर कह रहे हैं “घर-दुकान तो पहले ही लुट चुके थे, अब भगवान का नंबर आ गया।” मंदिर पहुंचे श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि धार्मिक भावनाओं की रक्षा कौन करेगा भगवान खुद या छत्तीसगढ़ सरकार?
यह घटना साफ तौर पर बता रही है कि पिथौरा में प्रशासन की नींद गहरी है। चोरों के हौसले बुलंद हो रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि पकड़े जाने का खतरा न के बराबर है।
तीखी नजर का तीखा सवाल
अगर मंदिर में चोरी हो सकती है, तो आम आदमी के घर की सुरक्षा की क्या उम्मीद रखें? क्या पिथौरा अब चोरों का स्वर्ग बन चुका है?
प्रशासन और पुलिस को अब सिर्फ बयानबाजी नहीं, ठोस कार्रवाई करनी होगी। वरना अगली बार चोर साहब मंदिर की आरती उतारकर ले जाएंगे और हम सब सिर्फ “जांच चल रही है” सुनते रह जाएंगे।
पिथौरा वासियों का आक्रोश जायज है।
कब तक चुप रहेंगे? कब तक सिर्फ आश्वासन पर गुजारा करेंगे?

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