कागज़ पर सड़कें चमचमाती हैं, पर ज़मीन पर सिर्फ धूल उड़ती है, जब जनता के सब्र का बांध टूटे, तब सत्ता की कुर्सी डोलती है!"





बागबाहरा/महासमुन्द:


स्वीकृत सड़कों पर प्रशासनिक 'ब्रेक': बागबाहरा में 15 जून को SDM दफ्तर का महा-घेराव!

सरकारें बदलती हैं, तारीखें बदलती हैं, और दफ्तरों की फाइलों में सड़कों को 'प्रशासकीय स्वीकृति' भी मिल जाती है। लेकिन महासमुन्द ज़िले के बागबाहरा इलाके की जनता आज भी पक्की सड़क के लिए तरस रही है! स्वीकृत सड़कें सिर्फ सरकारी कागजों पर बनकर रह गई हैं, और ज़मीन पर ग्रामीणों को मिल रहा है तो सिर्फ अनावश्यक विलंब, धूल और उपेक्षा।

​अब इस जनहित की अनदेखी के खिलाफ जनता का गुस्सा फूटने वाला है। आगामी 15 जून 2026, सोमवार को खल्लारी विधायक एवं जिलाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी महासमुंद के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कार्यालय बागबाहरा का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा।



आंदोलन का पूरा रूट और समय:



  • दिनांक: 15 जून 2026, सोमवार
  • समय: सुबह 11:00 बजे से
  • शुरुआत कहाँ से: PWD रेस्ट हाउस, बागबाहरा
  • गंतव्य  SDM कार्यालय, बागबाहरा

​ 'तीखी नज़र' का सवाल: इन 4 मुख्य मांगों पर प्रशासन चुप क्यों?



​इस जनआंदोलन के जरिए सीधे शासन-प्रशासन के रडार पर ये 4 तीखे सवाल दागे जाएंगे:



  1. बेलर से मोहदी मार्ग का निर्माण कार्य अब तक अधर में क्यों लटका है? शीघ्र निर्माण शुरू हो!
  2. पडकीपाली से हाड़ाबंद ब्रिज तक सड़क निर्माण कार्य में इतनी सुस्ती क्यों? काम तुरंत चालू किया जाए!
  3. अनवरपुर से सुखरीडबरी मार्ग के निर्माण में हो रही देरी का असली जिम्मेदार कौन है?
  4. ​जब इन सड़कों को प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है, तो निर्माण कार्य शुरू करने में यह 'अनावश्यक लेटलतीफी' किसके फायदे के लिए की जा रही है?

​ "अधिकारों की लड़ाई में जनता ही असली शक्ति है"



​ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बागबाहरा ग्रामीण के अध्यक्ष देवनाथ साहू, शहर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लखबीर सिंह छाबड़ा और कोमाखान ब्लॉक अध्यक्ष खेमराज सिन्हा ने संयुक्त रूप से क्षेत्रवासियों से अपील की है कि यह लड़ाई किसी दल की नहीं, बल्कि इस माटी के लोगों के बुनियादी हक (सड़क) की है। इसलिए सभी क्षेत्रवासी और जनप्रतिनिधि अधिक से अधिक संख्या में PWD रेस्ट हाउस पहुंचकर इस जनआंदोलन को अपनी ताकत दें।


'तीखी नज़र न्यूज़' की ज़मीनी टिप्पणी:


 सरकारी दफ्तरों के एयरकंडीशन कमरों में बैठे 'कागजी साहबों ' को अब जनता के पैरों में चुभने वाली गिट्टियों और धूल का हिसाब देना ही होगा। देखना दिलचस्प होगा कि 15 जून के इस कड़क घेराव के बाद प्रशासन की नींद टूटती है या फाइलें और धूल खाती हैं!

तीखी नजर न्यूज़ / सुरेन्द्र यादव 

मोब 7987825500

Post a Comment

أحدث أقدم
💬 WhatsApp