बसना:
महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत माधवपाली में इन दिनों वित्तीय अनिमितताओं का जो ‘खेल’ चल रहा है, उसने प्रशासनिक गलियारों में खलबली मचा दी है। 15वें वित्त आयोग की राशि के बंदरबांट का मामला अब सड़क पर आ गया है, जहां जांच करने पहुँची टीम के सामने ही सरपंच और ग्रामीण आमने-सामने हो गए, जिससे स्थिति अखाड़े में तब्दील हो गई।
कागजों पर हुआ विकास, धरातल पर है 'सन्नाटा'
ग्राम पंचायत की सरपंच उर्मिला बरिहा और सचिव वेदबाई चौहान पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने बिना किसी बैठक और प्रस्ताव के पिछले डेढ़ सालों में फर्जी तरीके से 11 लाख रुपये डकार लिए। हैरान करने वाली बात यह है कि बोरेवेल मरम्मत, रोलर पाइप, पानी टंकी, पचरी सुधार और पंचायत भवन की पुताई जैसे कामों के नाम पर सरकारी खजाना खाली कर दिया गया, जबकि धरातल पर इन कार्यों का नामो-निशान तक नहीं है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के अपूर्ण मकानों को पूर्ण दिखाकर भुगतान करने का भी शर्मनाक कारनामा सामने आया है।
जांच के दौरान गरमाया मामला: निजी बोर को बताया सरकारी
जब जांच दल रूपसिंह सिदार, गिरधारी पटेल और संदीप कुमार ने भौतिक सत्यापन शुरू किया, तो मामले ने और तूल पकड़ लिया। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जांच की भनक लगते ही आनन-फानन में लीपापोती शुरू की गई। सबसे सनसनीखेज मामला तब सामने आया जब प्रदीप जायसवाल के निजी बोरवेल को सरकारी बताकर जिओ-टैगिंग करने का प्रयास किया गया। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
अधिकारियों का आश्वासन, अब रिपोर्ट का इंतजार
पंचायत में सचिव के पति कमल चौहान द्वारा अवैध हस्तक्षेप करने की शिकायतों के बाद, तीजाराम साहू, संजय भास्कर, करीना सिदार और दीपिका साहू सहित दर्जनों ग्रामीणों ने एसडीएम को लिखित शिकायत दी थी। मुख्य जांच अधिकारी राजनारायण शर्मा ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों की हर शिकायत की बारीकी से जांच की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी और दोषियों से राशि की वसूली के साथ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
बड़ा सवाल:
क्या इस बार वाकई दोषियों पर गाज गिरेगी, या 11 लाख के इस घोटाले की फाइल भी फाइलों के बोझ तले दब जाएगी?
यह खबर जिस तरह से भड़की है, उसे देखते हुए क्या आपको लगता है कि प्रशासन इस पर सख्त कार्रवाई करेगा ?

إرسال تعليق