कोमाखान
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा (महासमुंद इकाई) द्वारा रविवार, 12 जुलाई को कोमाखान के 'विज्ञान आश्रम, कसेकेरा' में बागवानी के आधुनिक तरीकों पर आधारित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विज्ञान और पर्यावरण प्रेमी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षण के प्रमुख बिंदु
व्यावहारिक ज्ञान: कार्यशाला के दौरान डॉ. वाय.के. सोना, डॉ. विजय शर्मा और अन्य विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को खेतों में ले जाकर पौधों पर 'लाइव डेमो' दिया।
हैंड्स-ऑन लर्निंग:
विद्यार्थियों ने स्वयं बडिंग (Budding) और ग्राफ्टिंग (Grafting) की तकनीकों का अभ्यास किया, जिससे उन्हें पौधों के प्रवर्धन (Plant Propagation) की वैज्ञानिक विधि को समझने में मदद मिली।
पिथौरा की भागीदारी: इस प्रशिक्षण में संस्कार शिक्षण संस्थान, पिथौरा के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने विशेष रूप से भाग लिया। संस्थान की संचालिका श्रीमती सीमा गौरव चंद्राकर ने नेतृत्व मे ।
स्वरोजगार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का संगम
कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कार शिक्षण संस्थान की संचालिका श्रीमती सीमा गौरव चंद्राकर ने कहा
"इस तरह के व्यावहारिक प्रशिक्षण से न केवल बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि जागृत होती है, बल्कि वे कृषि की आधुनिक तकनीकों से भी परिचित होते हैं। यह कौशल विद्यार्थियों को भविष्य में स्वरोजगार के नए अवसर तलाशने में भी सहायक सिद्ध होगा।"
विज्ञान आश्रम के संचालक श्री विश्वास मेश्राम ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है। बागवानी के क्षेत्र में ये तकनीकी कौशल न केवल शैक्षणिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि एक सफल करियर का आधार भी बन सकते हैं।
भविष्य की राह
छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा का यह प्रयास क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थी तकनीक और प्रकृति के तालमेल को समझकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हो रहे हैं।


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