सड़क है या बहती नदी? पुलिया के नाम पर सरकारी कागजों में हुआ विकास, पर ज़मीनी हकीकत है कुछ और

 



महासमुंद:  


कांपा-बिरकोनी मार्ग की बदहाली को देखकर अब यह तय करना मुश्किल हो गया है कि यह रास्ता है या कोई उफनती हुई नदी! बारिश के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो चुका है और ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर आने-जाने को मजबूर हैं। 

प्रशासन के विकास के दावों की पोल खोलती इस सड़क पर एक पुलिया का निर्माण न होना ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन गया है। 

​बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर खतरा: नन्हे स्कूली बच्चे अपनी जान को हथेली पर रखकर पानी के बीच से रास्ता पार कर रहे हैं।

मजबूर ग्रामीण: 

गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए तो यह रास्ता किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।

एम्बुलेंस भी बेबस यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाए, तो समय पर एम्बुलेंस का पहुंचना नामुमकिन हो गया है, जिससे आपातकालीन स्थिति में ग्रामीणों की जान पर बन आती है।





प्रशासन की लापरवाही का कब होगा अंत?

​सड़क पर भरे पानी ने न केवल आवागमन को रोक दिया है, बल्कि सरकारी तंत्र के खोखले दावों को भी बेनकाब कर दिया है। ग्रामीण न तो अपने काम के लिए बाहर जा पा रहे हैं और न ही आपात स्थिति में कोई मदद मिल पा रही है। 


​  तीखी नज़र की अपील 


क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है? अब वक्त आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी इस मार्ग पर आकर हकीकत देखें और जल्द से जल्द पुलिया का निर्माण करवाएं, ताकि ग्रामीणों को इस नरक जैसी स्थिति से मुक्ति मिल सके। 

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